सुप्रीम कोर्ट में तीन नए जजों ने ईश्वर के नाम पर ली शपथ; 37 में सिर्फ 3 महिलाएं

सुप्रीम कोर्ट में तीन नए जजों ने ईश्वर के नाम पर ली शपथ; 37 में सिर्फ 3 महिलाएं
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को तीन नए न्यायाधीशों ने अपना शपथ ग्रहण किया और शपथ ईश्वर के नाम पर ली। राष्ट्रपति के प्रतिनिधि या चीफ जस्टिस के समक्ष आयोजित समारोह में इन जजों ने संवैधानिक और विधिक कर्तव्यों के निर्वहन की शपथ ली। शपथ लेने की प्रक्रिया संवैधानिक रूप से निर्धारित है और इसमें धर्मनिरपेक्ष या धार्मिक शपथ दोनों विकल्पों की अनुमति होती है।
समान अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के कुल-strength (कुल संख्या) में महिलाओं की संख्या पर भी ध्यान गया। वर्तमान सूची के अनुसार शीर्ष अदालत में कुल 37 सक्रिय जजों में सिर्फ तीन महिलाएं हैं, जो न्यायपालिका में लैंगिक प्रतिनिधित्व की कमी को उजागर करती है। यह अनुपात लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है और न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता, विविधता और समावेशिता पर विमर्श को बढ़ावा दे रहा है।
विधिक विशेषज्ञ कहते हैं कि उच्चतम न्यायालय में महिलाओं की कम भागीदारी न्यायिक निर्णयों के दृष्टिकोण और संवेदनशीलता को प्रभावित कर सकती है। कई वकील और नागरिक अधिकार समूह ने अधिक महिला प्रतिनिधित्व के लिए नियुक्ति प्रक्रियाओं में सुधार, कोर्ट के भीतर समलैंगिक नीति और योग्य महिला उम्मीदवारों के चयन को प्रोत्साहित करने की माँग उठाई है।
सुप्रीम कोर्ट से जुड़े आंकड़ों और सरकारीय बयानों के अनुसार न्यायाधीशों की नियुक्ति उच्चतम न्यायालयों के मानकों, अनुभव और योग्यता के आधार पर होती है। हालांकि, समावेशिता बढ़ाने के लिए कुछ देशों में आरक्षित कोट या नियुक्ति मानदंडों में संशोधन जैसे उपायों पर बहस चलती रही है, पर भारत में ऐसी कोई औपचारिक नीति अभी स्पष्ट रूप से लागू नहीं है।
अब यह देखना होगा कि न्यायपालिका और सरकार किस तरह से लंबित विमर्श को आगे बढ़ाते हैं और उच्च न्यायालयों में लैंगिक संतुलन के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। जब तक कोई आधिकारिक सुधार या नई नीति जारी नहीं होती, तब तक यह विषय सार्वजनिक एवं विधिक विमर्श का हिस्सा बना रहेगा।



