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जंग का असर भारत की रसोई तक, एलपीजी संकट के बीच सरकार ने दी राहत!

जंग का असर भारत की रसोई तक, एलपीजी संकट के बीच सरकार ने दी राहत

नई दिल्ली:
मध्यपूर्व में चल रही जंग का असर अब आम लोगों की ज़िंदगी पर साफ दिखने लगा है। रसोई गैस यानी एलपीजी की सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है और हालात ऐसे हैं कि मांग के मुताबिक गैस मिलना मुश्किल होता जा रहा है। वजह साफ है—भारत अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता है और वही सप्लाई अब अटकने लगी है।

जानकारी के मुताबिक, देश की करीब 60 फीसदी एलपीजी जरूरत आयात पर निर्भर है, और इसमें से ज्यादातर सप्लाई होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर आती है। लेकिन पिछले तीन हफ्तों से जारी तनाव के कारण भारत के 24 कार्गो जहाज़ इसी रास्ते में फंसे हुए हैं। इसका सीधा असर देश में गैस की उपलब्धता पर पड़ा है।

इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने अब राहत देने की कोशिश की है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने वाणिज्यिक यानी होटल, रेस्टोरेंट और इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी का कोटा बढ़ाने का फैसला किया है। अब राज्यों को 50 फीसदी तक गैस आवंटित की जाएगी, ताकि कारोबार पर ज्यादा असर न पड़े।

हालांकि, इसके साथ कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। अब कमर्शियल गैस लेने वालों को सरकारी तेल कंपनियों के साथ रजिस्ट्रेशन कराना होगा। बिना रजिस्ट्रेशन के उन्हें बढ़े हुए कोटे का फायदा नहीं मिलेगा। यानी राहत भी मिलेगी, लेकिन नियमों के साथ।

सरकार की कोशिश सिर्फ मौजूदा संकट को संभालने की नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए भी तैयारी की जा रही है। इसके तहत एलपीजी के बजाय पीएनजी यानी पाइपलाइन गैस को बढ़ावा दिया जा रहा है। सभी कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूज़र्स को पीएनजी कनेक्शन लेने के लिए कहा गया है, ताकि गैस की सप्लाई ज्यादा स्थिर और आसान हो सके।

राज्यों को भी इस दिशा में तेजी से काम करने के लिए कहा गया है। अगर वे पीएनजी नेटवर्क को बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त गैस आवंटन का फायदा मिलेगा। यानी अब सिर्फ गैस लेना ही नहीं, बल्कि सिस्टम को बेहतर बनाना भी जरूरी हो गया है।

सरकार का मानना है कि अगर ज्यादा से ज्यादा लोग पीएनजी से जुड़ेंगे, तो भविष्य में ऐसे संकट का असर कम होगा। फिलहाल, यह कदम उन कारोबारियों के लिए राहत लेकर आया है जो गैस की कमी से जूझ रहे थे।

कुल मिलाकर, जंग भले ही हजारों किलोमीटर दूर हो रही हो, लेकिन उसका असर अब हमारे किचन और कारोबार तक पहुंच चुका है। ऐसे में सरकार और लोगों—दोनों को मिलकर हालात संभालने होंगे।

Neeraj Kumar Srivastava

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