यूपी में कट सकते हैं भाजपा के आधे विधायकों के टिकट, कैसे गाजियाबाद से गोरखपुर तक बढ़ी टेंशन?

क्यों यूपी में कट सकते हैं भाजपा के आधे विधायकों के टिकट, कैसे गाजियाबाद से गोरखपुर तक बढ़ी टेंशन?
भाजपा ने 2022 के चुनाव में 376 सीटों पर अपने कैंडिडेट उतारे थे. इस बार यह आंकड़ा 328 पर जाकर रुक सकता है.
लखनऊ:
उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव कुछ महीने ही दूर है. इस बीच लगातार दो बार सत्ता में रह चुकी भाजपा तीसरे टर्म में वापसी के लिए पुरजोर कोशिश में जुटी है. इसके लिए फील्डिंग भी सेट की जा रही है और समीकरणों को साधने के लिए करीब आधे विधायकों के टिकट भी काटे जा सकते हैं. इसकी वजह सीधे तौर पर यह है कि ऐंटी-इनकम्बैंसी फैक्टर है. भाजपा ने लोकसभा चुनाव में बड़ी हार झेली थी और माना गया था कि कुछ सांसदों से लोग नाराज थे और उन्हें फिर से उतारा गया तो लोगों ने उनके खिलाफ मतदान किया. भाजपा सीधे 62 से 33 सीटों पर आ गई थी. ऐसे में अब पार्टी रिस्क नहीं लेना चाहती.
भाजपा के लिए ऐसा करना नया भी नहीं है. मध्य प्रदेश और गुजरात के चुनाव में भाजपा ने 35 से 40 फीसदी विधायकों के टिकट काट दिए थे. इसका उसे फायदा भी मिला और स्थानीय नाराजगी खत्म होती दिखी, जो मौजूदा विधायकों से थी. इसके अलावा कुछ टिकट इसलिए भी बदले जाएंगे ताकि सामाजिक समीकरणों को साधा जा सके. जैसे गैर-यादव ओबीसी की संख्या बढ़ सकती है. इसके अलावा दलित और युवा चेहरे भी बढ़ाने की कोशिश की जाएगी. फिर एक सवाल यह भी है कि कैसे राष्ट्रीय लोकदल को पश्चिम में साधा जाए. इसके अलावा अवध और पूर्वांचल में अपना दल, निषाद पार्टी और सुभासपा को भी साथ लेकर चलना है.



