लाओस में चीन की एंट्री: क्या है ड्रैगन का नया पैंतरेबाज़ी?

लाओस में चीन की एंट्री: क्या है ड्रैगन का नया पैंतरेबाज़ी?
चीन दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी रणनीतिक पकड़ को और मजबूत करने के लिए लगातार नए कदम उठा रहा है। लाओस की राजधानी वियनतियाने से कुछ ही दूरी पर स्थित बान केउन एयरपोर्ट पर दोनों देशों ने मिलकर एक नया ट्रेनिंग सेंटर शुरू करने का ऐलान किया है। हालांकि इसे आधिकारिक तौर पर पायलटों को प्रशिक्षण देने का केंद्र बताया जा रहा है, लेकिन वहां से सामने आई सैटेलाइट तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं।
सैटेलाइट तस्वीरों ने खोली पोल: बेस पर तैनात दिखे 8 लड़ाकू विमान
जैसे ही इस ट्रेनिंग सेंटर के शुरू होने की घोषणा हुई, उसके तुरंत बाद आई सैटेलाइट इमेज ने क्षेत्रीय देशों की नींद उड़ा दी है। इन तस्वीरों में एयरपोर्ट पर 8 अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और एक दर्जन से अधिक भारी सैन्य वाहन साफ तौर पर खड़े दिखाई दिए हैं। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्य ट्रेनिंग सेंटर के नाम पर चीन इस जगह को एक स्थायी एयरबेस या रणनीतिक सैन्य ठिकाने के रूप में विकसित कर रहा है, जिससे दक्षिण चीन सागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसका दबदबा और बढ़ जाएगा।
अमेरिका की पुरानी जमीन पर ड्रैगन का कब्जा
ऐतिहासिक रूप से यह इलाका और हवाई अड्डा रणनीतिक रूप से बेहद अहम रहा है, जिसका उपयोग कभी अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा किया जाता था। अब उसी पुरानी और ऐतिहासिक जमीन पर चीन का सैन्य साजो-सामान पहुंचना इस बात का संकेत है कि बीजिंग धीरे-धीरे इस क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव को पूरी तरह से पछाड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है।
वियतनाम और थाईलैंड की क्यों बढ़ी धड़कनें?
लाओस की सीमा सीधे तौर पर वियतनाम और थाईलैंड से जुड़ी हुई है। वियतनाम के साथ चीन के दक्षिण चीन सागर को लेकर पहले से ही क्षेत्रीय विवाद और तनाव चल रहे हैं। ऐसे में, ठीक अपनी सीमा के पास चीनी लड़ाकू विमानों और सैन्य बेस की मौजूदगी वियतनाम और थाईलैंड के लिए एक बड़ा सुरक्षा खतरा बन गई है। पड़ोसी देशों को डर है कि इस ठिकाने का इस्तेमाल भविष्य में उनपर सामरिक दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है।



