फ्लाईदुबई हादसे के बाद एयरपोर्ट पर फुल-बॉडी स्कैनर!

फ्लाईदुबई हादसे के बाद एयरपोर्ट पर फुल-बॉडी स्कैनर
भारत के एयरपोर्ट्स पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी शुरू हो गई है। फ्लाईदुबई की हालिया घटना के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) एयरपोर्ट सिक्योरिटी सिस्टम की समीक्षा कर रहा है। इसी कड़ी में देश के ज्यादा एयरपोर्ट्स पर फुल-बॉडी स्कैनर (FBS) लगाने की योजना बनाई जा रही है। पहले चरण में आठ एयरपोर्ट्स पर इन स्कैनर्स को लगाया जाएगा। मंत्रालय के सचिव समीर सिन्हा के मुताबिक, तीन एयरपोर्ट्स पर मशीनें पहुंच चुकी हैं, जबकि बाकी पांच एयरपोर्ट्स पर इन्हें जल्द लगाया जाएगा।
फ्लाईदुबई घटना के बाद बढ़ी चिंता
फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में उड़ान के दौरान भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर उनके को-पायलट ने कथित तौर पर हमला किया। घटना के बाद विमान को सुरक्षित उतारा गया और कैप्टन को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक उनकी हालत स्थिर है।
घटना के दौरान विमान में 174 यात्री सवार थे। रिपोर्टों के अनुसार, कैप्टन घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे, जिसके बाद यात्रियों और अन्य लोगों ने स्थिति को नियंत्रित करने में मदद की।
फुल-बॉडी स्कैनर कैसे करेगा काम
फुल-बॉडी स्कैनर सामान्य मेटल डिटेक्टर से अलग तकनीक पर काम करता है। यह शरीर पर छिपाई गई ऐसी वस्तुओं का पता लगाने में मदद कर सकता है, जो जरूरी नहीं कि धातु से बनी हों। भारत में इस्तेमाल होने वाले स्कैनर मिलीमीटर-वेव तकनीक का इस्तेमाल करते हैं और बिना शरीर को छुए स्क्रीनिंग करते हैं।
स्कैन के बाद सिस्टम किसी संदिग्ध वस्तु या असामान्य क्षेत्र को सुरक्षा कर्मियों के सामने चिन्हित कर सकता है। इससे सुरक्षा जांच में छिपी हुई वस्तुओं का पता लगाने की क्षमता बढ़ सकती है।
यात्रियों की प्राइवेसी का भी रखा जाएगा ध्यान
फुल-बॉडी स्कैनर को लेकर यात्रियों की प्राइवेसी एक अहम मुद्दा रहा है। मंत्रालय के मुताबिक भारत में लगाए जाने वाले स्कैनर ‘पिक्चर एग्नोस्टिक’ होंगे। इसका मतलब है कि मशीन यात्री के शरीर की वास्तविक तस्वीर दिखाने के बजाय शरीर का एक सामान्य प्रतिनिधित्व दिखाएगी और संदिग्ध वस्तु वाले हिस्से को चिन्हित करेगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सुरक्षा जांच को बेहतर बनाना है, साथ ही यात्रियों की व्यक्तिगत गोपनीयता को भी बनाए रखना है।



