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पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद हिंसा, TMC दफ्तरों में तोड़फोड़ के आरोप; कई इलाकों में तनाव!

पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद हिंसा, TMC दफ्तरों में तोड़फोड़ के आरोप; कई इलाकों में तनाव

पश्चिम बंगाल:
पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया है। भारतीय जनता पार्टी की जीत के बाद राज्य के कई हिस्सों से हिंसा और तोड़फोड़ की खबरें सामने आई हैं। आरोप है कि बीजेपी समर्थकों ने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के दफ्तरों को निशाना बनाते हुए आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं को अंजाम दिया।

पीटीआई के अनुसार, सोमवार दोपहर से ही टॉलीगंज, बारुईपुर, कमरहाटी, बारानगर, बहरामपुर, हावड़ा और कसबा जैसे इलाकों में भीड़ बेकाबू हो गई और कई जगहों पर टीएमसी कार्यालयों में नुकसान पहुंचाया गया। मंगलवार सुबह जमुड़िया विधानसभा क्षेत्र के रोतिबाती पंचायत इलाके में एक बार फिर तनाव बढ़ गया, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल बन गया।

टॉलीगंज के विजयगढ़-नेताजीनगर इलाके में टीएमसी उम्मीदवार और पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास के चुनाव कार्यालय में भी तोड़फोड़ की गई। वहीं रूबी क्रॉसिंग पर पार्षद सुशांत घोष के दफ्तर में भीड़ ने जमकर हंगामा किया। कई जगहों पर हमलावरों को पार्टी के झंडे लहराते और संपत्ति को नुकसान पहुंचाते देखा गया।

टीएमसी ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए आरोप लगाया कि सत्ता में आते ही बीजेपी का “असली चेहरा” सामने आ गया है। पार्टी ने दावा किया कि मुर्शिदाबाद और जलपाईगुड़ी समेत कई जगहों पर उनके दफ्तरों पर सुनियोजित हमले किए गए। एक मामले में मानिकतला वार्ड के अध्यक्ष, जो कैंसर से पीड़ित बताए जा रहे हैं, पर हमले का भी आरोप लगाया गया है।

आसनसोल में भी स्थिति बिगड़ गई, जहां विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठी। बताया जा रहा है कि रानीगंज पंचायत क्षेत्र में एक बीजेपी कार्यकर्ता पर हमले के विरोध में प्रदर्शन कर रहे समर्थक उग्र हो गए और उन्होंने टीएमसी कार्यालय में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। इसके बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया।

हालात को काबू में करने के लिए पुलिस और केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है। कोलकाता पुलिस ने बयान जारी कर कहा है कि सोशल मीडिया पर भ्रामक पोस्ट फैलाए जा रहे हैं, जिनमें पुराने या अन्य जगहों के वीडियो को कोलकाता से जोड़कर दिखाया जा रहा है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि शहर में स्थिति नियंत्रण में है और अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इन घटनाओं के बाद आम लोगों में चिंता और असुरक्षा का माहौल है। चुनावी जीत के जश्न के बीच हिंसा की ये तस्वीरें लोकतांत्रिक माहौल पर सवाल खड़े कर रही हैं, वहीं प्रशासन के सामने शांति बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

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