क्राइमगुजरात

डिमोलिशन रोकने के नाम पर सूरत में 15 लाख की डील, क्लास वन अधिकारी -पत्रकार की मिलीभगत बेनकाब

डिमोलिशन रोकने के नाम पर सूरत में 15 लाख की डील, क्लास वन अधिकारी -पत्रकार की मिलीभगत बेनकाब

 

ACB का दावा है कि दोनों के बीच गहरी मिलीभगत थी और पूरी डील 15 लाख में तय हुई थी, जिसमें बाकी 11 लाख सोमवार तक देने की बात थी. अब दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. फरार आरोपियों की तलाश में अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं.

सूरत:
सूरत नगर निगम में चल रहे कथित भ्रष्टाचार के बड़े खेल का एंटी करप्शन ब्यूरो ने पर्दाफाश किया है. लिंबायत ज़ोन के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर और एक स्थानीय अखबार के कथित पत्रकार पर डिमोलिशन रोकने के नाम पर लाखों की रिश्वत मांगने का आरोप है. एसीबी ने ट्रैप बिछाया, लेकिन कार्रवाई के दौरान आरोपी पत्रकार रकम लेकर फरार हो गया, इस मामले में अधिकारी भी जांच के घेरे में है. मामला सूरत नगर निगम के लिंबायत ज़ोन से जुड़ा है, जहां एक सब-इंडस्ट्रियल प्लॉट पर अवैध निर्माण को लेकर नोटिस जारी किया गया था. नवंबर में मनाही आदेश और फरवरी में आंशिक डिमोलिशन के बाद करीब 1 लाख 70 हजार रुपये का चार्ज भी वसूला गया था.लेकिन आरोप है कि बाकी निर्माण न तोड़ने के एवज में 21 लाख रुपये की मांग की गई. बातचीत और मोलभाव के बाद यह सौदा 15 लाख रुपये में तय हुआ.

इस मामले में मुख्य आरोपी हैं लिंबायत ज़ोन के क्लास वन अधिकारी एक्जीक्यूटिव इंजीनियर विपुल शशिकांत गणेशवाला. आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सीधे पैसे लेने के बजाय एक कथित पत्रकार के जरिए रिश्वत का नेटवर्क खड़ा किया.इस खेल में बिचौलिए की भूमिका निभाने वाला शख्स है मोहम्मद इस्माइल उर्फ परवाना जमीलखान पठान, जो ‘निष्पक्ष गुजरात पत्रिका’ नामक दैनिक अखबार से जुड़ा बताया जा रहा है. एसीबी के मुताबिक, वही इंजीनियर का खास आदमी बनकर शिकायतकर्ता पर लगातार दबाव बना रहा था.

Neeraj Kumar Srivastava

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