गंगा एक्सप्रेसवे लॉन्च से पहले अंतिम तैयारियां तेज, ढाबों से लेकर ग्लोबल फूड चेन तक होंगी सुविधाएं!

गंगा एक्सप्रेसवे लॉन्च से पहले अंतिम तैयारियां तेज, ढाबों से लेकर ग्लोबल फूड चेन तक होंगी सुविधाएं
लखनऊ/नई दिल्ली:
देश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे — गंगा एक्सप्रेसवे — के उद्घाटन से ठीक एक दिन पहले तैयारियां अपने चरम पर हैं। 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लोकार्पण करेंगे। उद्घाटन से पहले ग्राउंड पर गतिविधियां तेज हैं और हर सेक्शन में काम अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
रियलिटी चेक के दौरान सामने आया कि एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में फिनिशिंग का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। हर पॉकेट में 300 से अधिक कर्मचारी टोल प्लाजा, साइन बोर्ड, रंग-रोगन और अन्य सुविधाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे से जुड़ने वाले हिस्से पर खास तौर पर तैयारियां तेज नजर आईं।
करीब डेढ़ किलोमीटर आगे बढ़ते ही टोल प्लाजा और साइड सुविधाएं दिखाई देती हैं, जहां खान-पान और यात्री सेवाओं को व्यवस्थित किया जा रहा है। हालांकि कई फूड आउटलेट अभी खुलने बाकी हैं, लेकिन उन्हें लॉन्च से पहले तैयार करने की कोशिश जारी है। करीब 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा अडानी इंटरप्राइजेज ने तैयार किया है, जबकि शेष निर्माण आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर ने किया है। यह एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक सीधी कनेक्टिविटी देगा, जिससे प्रदेश के पूर्व और पश्चिम हिस्सों के बीच सफर तेज और आसान होगा।
गंगा एक्सप्रेसवे को सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि एक आधुनिक ट्रैवल कॉरिडोर के रूप में विकसित किया गया है। यहां यात्रियों को ढाबों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय फूड चेन, मोटेल, ईवी चार्जिंग स्टेशन, पेट्रोल-डीजल पंप और सर्विस सेंटर जैसी सुविधाएं मिलेंगी। ड्राइवरों के लिए अलग रेस्ट एरिया और बच्चों के लिए प्ले जोन भी तैयार किए गए हैं, जिससे लंबी दूरी का सफर अधिक आरामदायक हो सके।
एक्सप्रेसवे के साथ इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर (IMLC) विकसित किया गया है, जिससे 12 जिलों को सीधे औद्योगिक और व्यापारिक नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। स्थानीय उत्पादों—जैसे अमरोहा का हस्तशिल्प, संभल का क्राफ्ट और प्रतापगढ़ का आंवला—को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद न सिर्फ यात्रा का समय घटेगा, बल्कि उद्योग, कृषि और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी बड़ा फायदा मिलेगा। कुंभ और माघ मेले जैसे आयोजनों में ट्रैफिक का दबाव कम होगा और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। अब सबकी नजर 29 अप्रैल पर टिकी है, जब यह मेगा प्रोजेक्ट औपचारिक रूप से जनता के लिए खोल दिया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए एक बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित होगा।



