BIS ने तय किए नए मानक, दिव्यांग और अशक्त लोगों के लिए चलना, देखना और जीना होगा आसान!

BIS ने तय किए नए मानक, दिव्यांग और अशक्त लोगों के लिए चलना, देखना और जीना होगा आसान
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने हाल ही में दिव्यांग और अशक्त व्यक्तियों की सहायता के लिए कई नए मानक तय किए हैं, जिनका उद्देश्य उनके लिए जीवन को अधिक सुलभ, सुरक्षित और स्वतंत्र बनाना है। इन मानकों के लागू होने से दिव्यांगजनों को चलने‑फिरने, देखने और रोजमर्रा के काम‑काज करने में काफी आसानी मिलेगी।
किन उत्पादों और सुविधाओं के लिए मानक बनाए गए?
BIS ने व्हीलचेयर, बैसाखी (एल्बो क्रच), छड़ी (वॉकिंग स्टिक), पोर्टेबल व्हीलचेयर रैंप जैसे सहायक उपकरणों के लिए छह नए मानक जारी किए हैं। इनमें उत्पादों की सुरक्षा, डिजाइन, आयाम, सामग्री और प्रदर्शन से जुड़ी विस्तृत शर्तें शामिल हैं। इन मानकों का गठन अंतरराष्ट्रीय मानकों (ISO) के अनुरूप किया गया है ताकि भारत में बनने वाले दिव्यांग सहायता उपकरण वैश्विक गुणवत्ता के स्तर पर हों।
उदाहरण के तौर पर, बैसाखी (एल्बो क्रच) के लिए मानकों में हैंडग्रिप, टिप (सिरे) और उसकी लोड–बेयरिंग क्षमता की साफ‑साफ शर्तें निर्धारित की गई हैं। इसी तरह वॉकिंग स्टिक के लिए लकड़ी, बांस, एल्युमिनियम, प्लास्टिक और रबर से बनी छड़ियों के आयाम, मजबूती और प्रदर्शन के लिए मानदंड तय किए गए हैं।
देखने और आसान दिशा‑निर्देश के लिए नए मानक
दृष्टिबाधित और कम दृष्टि वाले लोगों की सुविधा के लिए स्पर्शनीय (टैक्टाइल) नक्शों और गाइड‑मैप के लिए एक अलग मानक बनाया गया है। इस मानक के तहत सार्वजनिक स्थानों, रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों और पार्कों में लगाए जाने वाले मार्ग‑निर्देशक टैक्टाइल नक्शों की डिजाइन, ऊंचाई, रास्ता दिखाने की विधि और सुरक्षा जैसे सभी बिंदु तय किए गए हैं। इससे दृष्टिबाधित व्यक्ति स्वतंत्र रूप से जरूरी सुविधाओं तक पहुंच पाएंगे।
साथ ही, सार्वजनिक और व्यावसायिक स्थानों पर ब्रेल लिपि में लगने वाले साइनबोर्ड (ब्रेल साइनेज) के लिए भी नया मानक तय किया गया है। इसमें ब्रेल अक्षरों का आकार, सामग्री, ऊंचाई, पाठ्य‑स्पष्टता और लेबलिंग की विधि जैसे बिंदु शामिल हैं, ताकि दिव्यांग लोग बिना किसी दिक्कत के संकेतों को पढ़कर सही दिशा पा सकें।



