जामिया में ‘युवा कुंभ’ पर बवाल: RSS कार्यक्रम को लेकर छात्रों का विरोध, कैंपस में बढ़ी सुरक्षा

जामिया में ‘युवा कुंभ’ पर बवाल: RSS कार्यक्रम को लेकर छात्रों का विरोध, कैंपस में बढ़ी सुरक्षा
नई दिल्ली:
जामिया मिलिया इस्लामिया के परिसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘युवा कुंभ’ कार्यक्रम को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कार्यक्रम को अनुमति दिए जाने के बाद छात्र संगठनों ने विरोध तेज कर दिया है, जिसके चलते पूरे कैंपस का माहौल तनावपूर्ण हो गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कैंपस के मुख्य गेटों और आसपास के इलाकों में भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। बैरिकेडिंग कर दी गई है और सुरक्षा एजेंसियां हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
छात्र संगठन SFI ने इस कार्यक्रम का कड़ा विरोध किया है। संगठन का कहना है कि यह आयोजन विश्वविद्यालय के धर्मनिरपेक्ष और समावेशी माहौल के खिलाफ है। छात्रों का आरोप है कि इस तरह के कार्यक्रम से अल्पसंख्यक छात्रों की भावनाएं आहत हो सकती हैं और यह कैंपस के माहौल को प्रभावित कर सकता है। विरोध कर रहे छात्रों का कहना है कि जामिया जैसे संस्थान, जहां बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक छात्र पढ़ते हैं, वहां ऐसे कार्यक्रम की अनुमति देना एक संवेदनशील मुद्दा है। उनके अनुसार, यह फैसला छात्रों के बीच वैचारिक टकराव पैदा कर सकता है।
कैंपस के अंदर और बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है, जबकि छात्र लगातार प्रशासन से कार्यक्रम की अनुमति वापस लेने की मांग कर रहे हैं। कई छात्रों ने सवाल उठाया है कि विश्वविद्यालय ने इस आयोजन को मंजूरी क्यों दी और क्या इसके प्रभावों पर पहले विचार किया गया था। प्रदर्शनकारी छात्रों ने प्रशासन से पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा है कि उन्हें इस फैसले के पीछे की वजह स्पष्ट करनी चाहिए।
बताया जा रहा है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुछ कॉलेजों में भी RSS के 100 साल पूरे होने पर कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। जामिया के छात्रों का आरोप है कि अब उसी क्रम में यहां भी कार्यक्रम कराए जा रहे हैं, जिससे कैंपस में वैचारिक ध्रुवीकरण बढ़ सकता है। फिलहाल प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति को संभालने में जुटी हैं। हालांकि, छात्रों का विरोध थमने के संकेत नहीं दिख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस विवाद को कैसे सुलझाता है और क्या कार्यक्रम को लेकर कोई नया फैसला लिया जाता है।



