राष्ट्रीय

सुप्रीम कोर्ट: ‘अब तक के कदम पूरी तरह फेल’, दिल्ली-NCR की जहरीली हवा पर बोले सीजेआई सूर्यकांत,

दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त मौखिक टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि अब तक प्रदूषण पर काबू पाने के लिए जो भी कदम उठाए गए हैं, वे पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं. सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने साफ शब्दों में कहा कि प्रदूषण में वास्तविक कमी लाने के लिए तात्कालिक नहीं, बल्कि व्यापक और लॉन्ग टर्म प्लानिंग की जरूरत है. सुनवाई के दौरान CJI ने वकीलों पर तंज भी कसा. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि ऐसे मामलों में एक्सपर्ट से सलाह कम मिलती है और वकील ही एक्सपर्ट बन जाते हैं. बच्चों की सेहत को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली सरकार के स्कूल बंद करने और हाइब्रिड मॉडल की व्यवस्था को अस्थायी पॉलिसी करार दिया. बेंच ने कहा कि ये फैसले केवल जोखिम को कुछ समय के लिए कम करने के उद्देश्य से लिए गए हैं. कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से इनकार करते हुए कहा कि शॉर्ट टर्म उपाय बच्चों और बुजुर्गों को अस्थायी सुरक्षा देने के लिए हैं. बेंच ने टिप्पणी की कि इन्हें सर्दियों की छुट्टियों का ही विस्तार माना जा सकता है, क्योंकि इस दौरान वैसे भी स्कूल 10 से 15 दिन बंद रहते हैं. इस मामले में अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी.

 

. क्या घर पर वैक्यूम क्लीनर है? मिड डे मील बंद होने पर कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं?

वकील गुरुस्वामी ने कोर्ट में जोरदार दलीलें पेश कीं. उन्होंने कहा कि पिछले साल 85 परसेंट गरीब बच्चे स्कूल नहीं जा पाए. इससे कुपोषण फैल रहा है. जब स्कूल बंद होते हैं तो हम यह पक्का करते हैं कि गरीब बच्चों को खाना न मिले. उन्होंने पूछा कि घर पर बिठाकर बच्चों की सुरक्षा कैसे होगी. क्या उनके घरों में वैक्यूम क्लीनर हैं. गरीब बच्चे पैदल स्कूल जाते हैं. वे प्रदूषण में योगदान नहीं दे रहे हैं.

 

. क्या 16 साल के बच्चों की इम्युनिटी ज्यादा है? हाइब्रिड क्लास पर क्या बोले वकील?

सीनियर वकील लूथरा ने हाइब्रिड क्लास की मांग की. उन्होंने कहा कि यह ऑप्शन 12वीं क्लास तक होना चाहिए. ऐसा नहीं है कि 16 से 17 साल के बच्चों की इम्युनिटी ज्यादा बेहतर होती है. एएसजी भाटी ने कहा कि रविवार से गंभीर इमरजेंसी बनी हुई है. बच्चों की जान खतरे में है. सड़कों पर भीड़ कम करने की कोशिश की जा रही है. कोर्ट ने कहा कि अगर पेरेंट्स बच्चों को स्कूल छोड़ते हैं तो उसमें भी रिस्क है.

. क्या ऑनलाइन पढ़ाई सिर्फ अमीरों के लिए है?

कोर्ट में यह बात उठी कि हाइब्रिड पढ़ाई अमीर परिवारों के फेवर में है. गरीब बच्चे इसका सबसे ज्यादा नुकसान झेलते हैं. सीजेआई ने कहा कि संपन्न लोग अपने बच्चों को सेफ रख लेंगे. लेकिन बाकी बच्चे रिस्क में रहेंगे. यह सिस्टम भेदभाव पैदा कर सकता है. कोर्ट ने माना कि प्रदूषण से बुजुर्ग भी खतरे में हैं. पार्क जैसी पब्लिक जगहों पर जाना भी सेफ नहीं रह गया है. एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि 15 दिसंबर को हालात बेहद गंभीर थे. इसलिए स्कूल बंद करने पड़े.

saamyikhans

former crime reporter DAINIK JAGRAN 2001 and Special Correspondent SWATANTRA BHARAT Gorakhpur. Chief Editor SAAMYIK HANS Hindi News Paper/News Portal

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