भारत ने कोर्ट ऑफ़ आर्ब्रिट्रेशन का फैसला खारिज किया — कहा: सिंधु जल संधि पर यह न्यायाधिकरण अधिकारक्षेत्र में नहीं

भारत ने कोर्ट ऑफ़ आर्ब्रिट्रेशन का फैसला खारिज किया — कहा: सिंधु जल संधि पर यह न्यायाधिकरण अधिकारक्षेत्र में नहीं
केंद्रीय सरकार ने कोर्ट ऑफ़ आर्ब्रिट्रेशन द्वारा हाल ही में जारी किए गए सिंधु जल संधि से संबंधित निर्णय को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय और सरकार के कानूनी सलाहकारों के बयानों के अनुसार, आर्बिट्रेशन पैनल ने जिन प्रावधानों और निर्देशों के आधार पर फैसला सुनाया है, वे संधि के दायरे तथा विवाद समाधान के समझौते के अनुरूप नहीं हैं और इसलिए यह न्यायाधिकरण इस मामले में अपना अधिकारक्षेत्र पार कर गया है।
सरकारी स्रोतों का कहना है कि सिंधु जल संधि की व्याख्या और उसके लागू होने के तरीके पर विवादों का समाधान द्विपक्षीय बातचीत और संधि में तय प्रक्रियाओं के माध्यम से होना चाहिए, न कि ऐसे आदेशों के जरिये जो संधि के प्रावधानों का विस्तार कर दें। बयान में कहा गया है कि भारत अपने संप्रभु अधिकारों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी कानूनी विकल्पों का प्रयोग करेगा, जिसमें आवश्यक होने पर उच्चतर न्यायालयों में चुनौती भी शामिल है।
विवरण और पृष्ठभूमि में सरकारी नोट में यह भी बताया गया है कि सरकार ने पहले भी स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप या आर्बिट्रेशन के दायरे का विस्तार संधि के मूल उद्देश्य के विरुद्ध होगा। मंत्रालय ने कहा कि वह आर्बिट्रेशन के निर्णय का औपचारिक विश्लेषण कर रहा है और जल्द ही आगे की कानूनी और राजनयिक रणनीति की घोषणा करेगा।
प्रतिक्रियाएं और आगे की कार्रवाई:
सरकार ने संबंधित पक्षों के साथ द्विपक्षीय संवाद तेज करने का संकेत दिया है और कहा है कि बातचीत से समाधान निकालना प्राथमिकता रहेगी।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भारत संभवतः निर्णय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनौती देगा और घरेलू अदालतों में भी निष्पक्ष कानूनी रास्ते तलाश सकता है।
दोनों देशों के बीच आगे की कूटनीतिक चर्चाओं और तकनीकी स्तर पर वार्ताओं की उम्मीद है ताकि संधि के प्रावधानों के अनुरूप स्थायी समाधान निकल सके।
सरकारी बयान के अनुसार जनता और मीडिया को प्रासंगिक और सत्यापित जानकारी ही जारी की जाएगी, और किसी भी नए विकास पर आधिकारिक अपडेट दिए जाएंगे।



