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अब जज तय करेंगे किसकी कटेगा वोट और कौन होगा वोटर? ममता vs ECI विवाद के बीच CJI सूर्यकांत ने बंगाल में किया खेल!

*अब जज तय करेंगे किसकी कटेगा वोट और कौन होगा वोटर? ममता vs ECI विवाद के बीच CJI सूर्यकांत ने बंगाल में किया खेल*
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) को लेकर जारी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक असाधारण और कड़ा फैसला सुनाया है. मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की बेंच ने चुनाव आयोग (EC) और तृणमूल कांग्रेस सरकार के बीच जारी “दुर्भाग्यपूर्ण आरोप-प्रत्यारोप” पर गहरी नाराजगी व्यक्त की. हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने आदेश दिया है कि राज्य में मतदाता सूची के संशोधन कार्य में सहायता के लिए सेवारत और पूर्व जिला न्यायाधीशों को तैनात किया जाए.
न्यायिक अधिकारियों की होगी सीधी निगरानी
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया है कि वे इस कार्य के लिए न्यायिक अधिकारियों को उपलब्ध कराएं. कोर्ट ने यह सख्त कदम इसलिए उठाया क्योंकि राज्य सरकार ने इस संशोधन प्रक्रिया के लिए पर्याप्त ग्रेड ‘A’ अधिकारी उपलब्ध नहीं कराए थे. अब ये न्यायिक अधिकारी ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी लिस्ट’ (तार्किक विसंगति सूची) में रखे गए व्यक्तियों के दावों और आपत्तियों का निपटारा करेंगे. कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि इन न्यायिक अधिकारियों द्वारा पारित आदेश ‘अदालत के आदेश’ माने जाएंगे.
मतदाता सूची में ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ का मामला
यह पूरा विवाद 2002 की मतदाता सूची के साथ मिलान के दौरान आई विसंगतियों से जुड़ा है. इसमें कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां मतदाता और उसके माता-पिता की आयु के बीच का अंतर 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक पाया गया है. इसके अलावा माता-पिता के नाम में मिलान न होने जैसी खामियां भी ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ श्रेणी में रखी गई हैं.
सुरक्षा और समय सीमा पर निर्देश
शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को 28 फरवरी तक राज्य में मतदाताओं की ‘ड्राफ्ट लिस्ट’ प्रकाशित करने की अनुमति दे दी है. साथ ही, आयोग बाद में पूरक सूचियां भी जारी कर सकेगा. कोर्ट ने सभी जिला कलेक्टरों और एसपी को निर्देश दिया है कि वे तैनात न्यायिक अधिकारियों को रसद सहायता और सुरक्षा प्रदान करें. कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को शनिवार तक मुख्य सचिव, डीजीपी और चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ बैठक करने का भी निर्देश दिया गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की मदद के लिए न्यायिक अधिकारियों को तैनात करने का असाधारण आदेश क्यों दिया?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के बीच “दुर्भाग्यपूर्ण आरोप-प्रत्यारोप” का दौर चल रहा था. चुनाव आयोग का आरोप था कि राज्य सरकार मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के लिए पर्याप्त ‘ग्रेड-ए’ अधिकारी उपलब्ध नहीं करा रही है. इस गतिरोध के कारण चुनावी प्रक्रिया में देरी हो रही थी और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे थे. कोर्ट ने प्रशासन पर निर्भरता कम करने और प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी व विवादमुक्त बनाने के लिए पहली बार सेवारत और पूर्व जिला न्यायाधीशों को इस काम में लगाने का आदेश दिया है.
मतदाता सूची में मौजूद ‘तार्किक विसंगतियों’ (Logical Discrepancies) का मुख्य आधार क्या है और ये क्यों विवाद का विषय हैं?
उत्तर: ‘तार्किक विसंगतियों’ का सीधा संबंध 2002 की वोटर लिस्ट और वर्तमान डेटा के बीच के बेमेल आंकड़ों से है. इसमें सबसे गंभीर मामला उम्र के अंतर का है; जैसे कि मतदाता और उसके माता-पिता की आयु में अंतर 15 वर्ष से कम पाया जाना या 50 वर्ष से अधिक होना, जो जैविक रूप से असामान्य है. इसके अलावा, माता-पिता के नामों की स्पेलिंग में भारी अंतर और वंशावली मिलान (Progeny Linking) में गड़बड़ी पाए जाने पर नामों को ‘डिस्क्रिपेंसी लिस्ट’ में डाल दिया गया है. इन लाखों नामों की शुद्धता की जांच करना ही इस पूरी कानूनी लड़ाई की मुख्य वजह है.
कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारियों की भूमिका और उनकी शक्तियों का दायरा क्या होगा?
उत्तर: नियुक्त किए गए न्यायिक अधिकारी केवल सलाहकार की भूमिका में नहीं होंगे, बल्कि उनके पास निर्णय लेने की न्यायिक शक्ति होगी. वे ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी लिस्ट’ में शामिल व्यक्तियों के दावों और आपत्तियों की सुनवाई करेंगे और उन पर अंतिम फैसला सुनाएंगे. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि इन अधिकारियों द्वारा दिया गया कोई भी आदेश ‘अदालत का आदेश’ (Order of Court) माना जाएगा, जिसे प्रशासनिक स्तर पर चुनौती नहीं दी जा सकेगी. उन्हें माइक्रो-ऑब्जर्वर्स और राज्य के अधिकारियों का सहयोग मिलेगा, लेकिन अंतिम निर्णय का अधिकार इन्हीं न्यायिक अधिकारियों के पास सुरक्षित रहेगा
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों (SPs) को सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स के संबंध में क्या सख्त निर्देश दिए हैं?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा चिंताओं को भांपते हुए राज्य के सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया है. आदेश में कहा गया है कि वे ड्यूटी पर तैनात न्यायिक अधिकारियों को न केवल आवश्यक कार्यालय और परिवहन सुविधाएं (Logistical Support) प्रदान करेंगे, बल्कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल भी मुहैया कराएंगे. यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिम बंगाल में चुनाव पूर्व अक्सर हिंसा और प्रशासनिक असहयोग की शिकायतें सामने आती रही हैं. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इसमें किसी भी प्रकार की कोताही को अदालत की अवमानना माना जाएगा.
कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की इस पूरी प्रक्रिया में क्या जिम्मेदारी तय की गई है?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को इस पूरी व्यवस्था की ‘धुरी’ बनाया है. उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे तुरंत राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) और चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक करें. इस बैठक का उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और उनके काम करने के तरीके का रोडमैप तैयार करना है. उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि 28 फरवरी तक चुनाव आयोग हर हाल में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित कर सके, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में कोई संवैधानिक संकट खड़ा न हो.

Neeraj Kumar Srivastava

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