भारत की मैन्युफैक्चरिंग उछाल और सरकार की बड़ी रणनीतियाँ

भारत की मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मौजूदा समय में जो वृद्धि हो रही है, वह सिर्फ संख्याओं में नहीं है बल्कि सब्सटैंशियल बदलाव ला रही है जो देश की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेगी। हाल ही में सरकारी रिपोर्ट में बताया गया कि जुलाई 2025 में इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रIAL प्रोडक्शन (IIP) के अंदर मैन्युफैक्चरिंग की 23 औद्योगिक श्रृँखलियों में से लगभग 14 श्रृँखलियों ने सालाना आधार पर बढ़त दर्ज की है। इन में बुनियादी धातुएँ (basic metals), इलेक्ट्रिकल उपकरण और नॉन-मेटैलिक मिनरल प्रोडक्ट्स प्रमुख हैं।
‘मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई’ यानी कि उत्पादन की स्थितियों को मापने वाला सूचकांक भी बढ़ रहा है; अगस्त 2025 में यह करीब 59.3 के स्तर पर पहुँचा, जो 16 महीनों का उच्चतम स्तर है। यह संकेत है कि उत्पादन, मांग, इन्वेंटरी और इनपुट क्रय में गतिविधियाँ तेज हो रही हैं।
सरकार की विभिन्न नीतियाँ और प्रोत्साहन योजना जैसे कि PLI (Production Linked Incentive) स्कीम, इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण को बढ़ावा, टेक्सटाइल्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर में निवेश, तथा स्टार्टअप्स को DPIIT मान्यता आदि शामिल हैं। इलेक



