चंपत राय से बेहतर कोई नहीं, महासचिव पद पर हो उनकी वापसी’, राम जन्मभूमि ट्रस्ट की बैठक से पहले बोले कमल नयन दास!

चंपत राय से बेहतर कोई नहीं, महासचिव पद पर हो उनकी वापसी’, राम जन्मभूमि ट्रस्ट की बैठक से पहले बोले कमल नयन दास
राम जन्मभूमि ट्रस्ट की अहम बैठक से पहले ट्रस्ट अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी कमल नयन दास ने आजतक से बातचीत में कहा कि ट्रस्ट का मकसद सिर्फ इतना है कि मंदिर की व्यवस्था बिना रुकावट चलती रहे. उन्होंने चंपत राय को उन्होंने निर्दोष बताया और कहा कि उनके साथ विश्वासघात हुआ है.
राम जन्मभूमि ट्रस्ट की आज होने वाली अहम बैठक से पहले ट्रस्ट अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी माने जा रहे कमल नयन दास ने आजतक से खास बातचीत की. उन्होंने साफ कहा कि ट्रस्ट का एक ही मकसद है कि मंदिर का काम सुचारू रूप से चलता रहे और भोग राग में कोई बाधा न आए.
सीईओ पद को लेकर उठे विवाद पर उन्होंने कहा कि यह ट्रस्ट हिंदू समाज का है, किसी सरकार का नहीं. उन्होंने महासचिव चंपत राय को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए कहा कि उनकी वापसी जरूर होनी चाहिए और मंदिर से जुड़े हर फैसले में साफगोई बनी रहनी चाहिए.
कमल नयन दास ने कहा कि सीईओ पद पर चल रहा विवाद बेवजह है क्योंकि यह मंदिर ट्रस्ट हिंदू समाज की संपत्ति है, इसका सरकार से कोई लेना देना नहीं है. उन्होंने उन लोगों पर भी सीधा निशाना साधा जो आज चोरी की बात उठा रहे हैं. उनका कहना था कि यही लोग पहले अदालत में भगवान राम को काल्पनिक बताया करते थे, और अब उन्हें अचानक चोरी की चिंता सताने लगी है, जबकि पहले इन्हें मंदिर से कोई सरोकार नहीं था
उन्होंने पुराने दिनों को भी याद किया और बताया कि निहत्थे कारसेवकों पर गोलियां चलाई गई थीं, और यह सब उन्होंने अपनी आंखों से देखा है. उनका दावा है कि जो लोग आज सवाल उठा रहे हैं, उनका मंदिर आंदोलन से कभी कोई नाता नहीं रहा और वे अब बेवजह विवाद खड़ा कर रहे हैं.
चंपत राय के बारे में पूछे जाने पर कमल नयन दास ने कहा कि वे उन्हें जन्म से जानते हैं और उनकी पूरी कार्यशैली और व्यवस्था से वाकिफ हैं. उन्होंने कहा कि चंपत राय ने राम जन्मभूमि के लिए बहुत बड़ा योगदान दिया है और उनके साथ विश्वासघात हुआ है.
आज की बैठक में चंपत राय को लेकर चर्चा होने की संभावना पर उन्होंने कहा कि चंपत राय से बेहतर कोई और नहीं मिलेगा, इसलिए उनकी महासचिव पद पर वापसी बिल्कुल होनी चाहिए, यह उनकी साफ राय है. सीईओ पद के मसले पर उन्होंने दोहराया कि यह फैसला ट्रस्ट को खुद करना है, मंदिर का पूरा संचालन आखिरकार साधु संत ही करेंगे, यही परंपरा भी रही है.



