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भारत-बांग्लादेश के बीच दिसंबर में खत्म हो रही गंगा जल संधि, रिन्यू की शर्तों को लेकर दोनों देशों में मतभेद!

भारत-बांग्लादेश के बीच दिसंबर में खत्म हो रही गंगा जल संधि, रिन्यू की शर्तों को लेकर दोनों देशों में मतभेद

फरक्का बांध पश्चिम बंगाल के मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों में बांग्लादेश के चापाइनवाबगंज जिले से 18 किलोमीटर ऊपर की ओर स्थित है. बांध के चालू होने के दो दशक से अधिक समय बाद, भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में हस्ताक्षरित ऐतिहासिक जल-बंटवारे का समझौता अब समाप्त होने की कगार पर है.

बांग्लादेश और भारत के बीच गंगा जल बंटवारे को लेकर कोई नया समझौता अब तक नहीं हुआ है. दोनों देशों के बीच गंगा जल बंटवारा समझौता इस वर्ष दिसंबर में समाप्त हो रहा है. दोनों देशों की तकनीकी टीमों ने इस संबंध में प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी हैं. इन तैयारियों के बीच, भारत अनौपचारिक रूप से नए समझौते के लिए एक नए फॉर्मूले पर चर्चा कर रहा है, जिसे बांग्लादेशी जल संसाधन विशेषज्ञ ‘तर्कहीन’ मानते हैं. उनका यह भी कहना है कि भारत की ओर से आ रहे नए बयानों से समझौते को रिन्यू करने का मुद्दा संकट में पड़ सकता है.

बांग्लादेश गंगा जल संधि के लिए बेकरार
बांग्लादेश की सत्तारूढ़ बीएनपी ने शनिवार को कहा कि भारत के साथ देश के संबंध एक नई गंगा जल बंटवारे संधि पर निर्भर करेंगे और ढाका की अपेक्षाओं और जरूरतों के अनुरूप समझौते के लिए नई दिल्ली से तत्काल बातचीत की मांग की. बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने एक कार्यक्रम में कहा, “हम भारतीय सरकार को स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि बांग्लादेश के लोगों की अपेक्षाओं और जरूरतों के अनुरूप बातचीत के माध्यम से एक (नई गंगा) संधि को तत्काल लागू किया जाना चाहिए.” स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्री आलमगीर ने कहा कि भारत के साथ अच्छे संबंध स्थापित करने का अवसर “गंगा जल बंटवारे संधि या फरक्का समझौते पर हस्ताक्षर पर निर्भर करेगा.”

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