अब पीछे नहीं रहेगा भारत, होर्मुज पर तनाव के बीच!

अब पीछे नहीं रहेगा भारत, होर्मुज पर तनाव के बीच ओमान-UAE तक ‘पाइपलाइन’ बिछाने का फैसला… इतना होगा खर्च
ईरान अमेरिका जंग और होर्मुज संकट के बीच भारत एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है और गहरे समुद्र के अंदर बड़ा गैस पाइपलाइन बिछाने जा रहा है. जिसकी अनुमानित लागत 40 हजार करोड़ रुपये है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में टेंशन के बीच भारत खाड़ी देशों से निर्बाध गैस आपूर्ति तय करने के लिए एक सीधी गहरे समुद्र की पाइपलाइन बिछाने की योजना को तेजी से आगे बढ़ा रहा है. सरकार अस्थिर LNG स्पॉट बाजारों पर निर्भरता कम करने के लिए एनर्जी सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है.
द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि ओमान से प्रस्तावित पाइपलाइन की अनुमानित लागत 40,000 करोड़ रुपये (करीब 4.7-4.8 अरब डॉलर) है और इसे पूरा होने में पांच से सात साल लगने की उम्मीद है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि मंत्रालय सरकारी कंपनियों गेल, इंजीनियर्स इंडिया और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को प्राइवेट कंसोर्टियम साउथ एशिया गैस एंटरप्राइज (SAGE) द्वारा किए गए स्टडी के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहेगा. रिपोर्ट से ओमान के साथ गैस आपूर्ति, फंडिंग और प्रोजेक्ट पर औपचारिक सरकारी स्तर की वार्ता संभव हो सकेगी.
कहां से होकर गुजरेगी ये पाइपलाइन
अधिकारी ने बताया कि पाइपलाइन का मार्ग भू-राजनीतिक तौर पर संवेदनशील क्षेत्रों से बचते हुए ओमान और संयुक्त अरब अमीरात से होकर अरब सागर से गुजरेगा. रिपोर्ट के अनुसार, इस पाइपलाइन से भारत को ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ईरान, तुर्कमेनिस्तान और कतर से गैस प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी, जो 2,500 ट्रिलियन घन फीट गैस भंडार वाला क्षेत्र है.
कितनी गहराई में होगी ये पाइपलाइन?
यह पाइपलाइन 3,450 मीटर तक की गहराई में बिछाई जा सकती है, जिससे यह विश्व स्तर पर सबसे गहरी समुद्री पाइपलाइनों में से एक बन जाएगी. गहरे समुद्र में पाइप बिछाने और मरम्मत की तकनीक में हुई प्रगति ने इस परियोजना को संभव बना दिया है. SAGE ने समुद्र तल की स्थितियों का अध्ययन करने के लिए 25 करोड़ रुपये की लागत से मार्ग के साथ लगभग 3,000 मीटर टेस्टिंग पाइपलाइन बिछाई है.
तनाव के बीच भारत ने उठाया बड़ा कदम
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक व्यापक संकट का केंद्र बना हुआ है. हाल ही में अमेरिका और चीन के सीनियर अधिकारियों ने सहमति जताई कि होर्मुज से कोई भी देश जहाजरानी शुल्क नहीं लगाएगा. अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अप्रैल में इस मुद्दे पर चर्चा की थी.
गौरतलब है कि 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हवाई हमलों के बाद से ईरान द्वारा व्यापार मार्ग को लगभग पूरी तरह से बंद कर देने से ग्लोबल एनर्जी मार्केट अस्थिर हो गए हैं. चीन के दूतावास ने होर्मुज से सामान्य यातायात बहाल करने के लिए सहयोग की उम्मीद जताई है, जिससे दुनिया की अधिकतर तेल और गैस आपूर्ति होती है. तेहरान ने संघर्ष समाप्त करने की शर्त के रूप में जहाजों पर टोल वसूलने का अधिकार मांगा है, जबकि अमेरिका ने ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी लगा रखी है.



