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बिंदी-तिलक की मनाही, हिजाब को परमिशन.. TCS के बाद चर्चा में Lenskart का ड्रेस कोड!

बिंदी-तिलक की मनाही, हिजाब को परमिशन.. TCS के बाद चर्चा में Lenskart का ड्रेस कोड

इन दिनों TCS नासिक ऑफिस के एचआर पॉलिसी लेकर विवाद चर्चा में है. इस बीच लेंसकार्ट के वर्कप्लेस ड्रेस कोड को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है. जानते हैं अब लेंसकार्ट से जुड़ा ये नया मामला क्या है.

इन दिनों TCS के नासिक ऑफिस में एचार पॉलिसी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. वहां की एचआर हेड पर कर्मचारियों को धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने और दबाव डालने जैसे आरोप लग रहे हैं. इसी बीच लेंसकार्ट से जुड़ी एक ड्रेसकोड पॉलिसी का डॉक्यूमेंट लीक हो गया. हालांकि, इस पर लेंसकार्ट के फाउंडर की सफाई भी आई है. ऐसे में समझते हैं यह पूरा मामला क्या है.

TCS के बाद अब लेंसकार्ट को अपनी ग्रूमिंग गाइड को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. क्योंकि कंपनी के ड्रेसकोड पॉलिसी से जुड़े एक लीक डॉक्यूमेंट की कुछ बातों ने लोगों का ध्यान खींचा है. इस लीक डॉक्यूमेंट के मुताबिक, यह आईवियर स्टार्टअप अपने वर्कप्लेस पर कर्मचारियों को हिजाब पहनने की अनुमति देता है, लेकिन बिंदी, तिलक और कलावा पहनना बैन करता है.

लेंस्कार्ट ऑफिस के ड्रेस कोड संबंधी गाइडलाइन से जुड़ा एक डॉक्युमेंट लीक होने से भारी विवाद खड़ा हो गया है. क्योंकि लोगों ने इस बात पर ध्यान दिलाया कि इसमें वर्क प्लेस पर बिंदी और तिलक लगाने की अनुमति नहीं है, जबकि हिजाब की परमिशन है.

इस पर लेंसकार्ट के संस्थापक और सीईओ पीयूष बंसल ने स्पष्ट किया कि कंपनी की नीतियों में बदलाव आया है और यह डॉक्यूमेंट उनके वर्तमान गाइडलाइन को नहीं दिखाती है. विवाद बढ़ने पर, लेंस्कार्ट के संस्थापक और सीईओ पीयूष बंसल ने स्पष्ट किया कि नीतिगत दस्तावेज़ गलत था.

लेंसकार्ट के वर्कप्लेस के लिए ड्रेस कोड संबंधी पॉलिसी का जो डॉक्यूमेंट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया गया और इसके परिणामस्वरूप कंपनी को भारी विरोध का सामना करना पड़ा. सिंदूर, जो विवाहित हिंदू महिलाओं की पहचान है. उसके बारे में लेंसकार्ट के दस्तावेज में कहा गया है कि यदि सिंदूर लगाना हो, तो उसे कम से कम लगाना चाहिए और वह माथे पर नहीं गिरना चाहिए. इसमें लिखा है कि बिंदी लगाने की अनुमति नहीं है.

वहीं इस डॉक्यूमेंट में हिजाब पहनने की अनुमति है. ऑनलाइन शेयर किए गए ड्रेस कोड दस्तावेज में लिखा है कि हिजाब/पगड़ी पहनने पर उसका रंग काला होना चाहिए. हिजाब से शरीर का ऊपरी हिस्सा ढका होना चाहिए और लोगो नहीं ढकना चाहिए. वहीं दुकान में बुर्का पहनने को मना किया गया है. इसमें लिखा है, बिंदी क्लचर की अनुमति नहीं है. कलावा के संदर्भ में धार्मिक धागे या कलाईबंद उतारकर ऑफिस आना होगा.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेफाली वैद्य नाम की एक यूजर ने लिखा है – हाय पीयूष बंसल, कृपया क्या आप यह स्पष्ट कर सकते हैं कि लेंसकार्ट पर हिजाब ठीक है लेकिन बिंदी, कलवा क्यों नहीं? यूजर ने लेंसकार्ट के संस्थापक को टैग करते हुए X पर यह पोस्ट शेयर किया है.

इस पर पीयूष बंसल की प्रतिक्रिया से ऐसा लगता है कि लेंसकार्ट के पास पहले से इस तरह की ग्रूमिंग गाइड मौजूद थी. पीयूष ने लिखा है – मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि यह दस्तावेज हमारा वर्तमान गाइड लाइन को नहीं दर्शता है. हमारी ग्रूमिंग पॉलिसी वर्षों से विकसित होती रही है. आउटडेटेड वर्जन आज हमारी स्थिति को नहीं दर्शाते हैं. इस स्थिति से उत्पन्न भ्रम और चिंता के लिए हम क्षमा चाहते हैं.

बंसल ने कहा कि लेंसकार्ट ने बिंदी और तिलक सहित किसी भी प्रकार की धार्मिक अभिव्यक्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है. उन्होंने आगे कहा कि कंपनी नियमित रूप से अपने दिशानिर्देशों की समीक्षा करती रहती है.हमारे पास पूरे भारत में हजारों टीम मेंबर्स हैं जो हमारे स्टोर्स में हर दिन गर्व से अपने धर्म और संस्कृति का प्रदर्शन करते हैं. वे ही लेंसकार्ट हैं.

Neeraj Kumar Srivastava

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