क्यों महिला वोटर हैं ममता बनर्जी की ताकत? पश्चिम बंगाल में महिला सशक्तीकरण की नई कहानी

क्यों महिला वोटर हैं ममता बनर्जी की ताकत? पश्चिम बंगाल में महिला सशक्तीकरण की नई कहानी
पश्चिम बंगाल में पिछले दशक में महिलाओं की भूमिका राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है. ममता सरकार की रूपश्री, कन्याश्री और लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाओं ने महिलाओं को शिक्षा, वित्तीय सहारा और उद्यमिता से जोड़कर उन्हें राज्य की नीतियों व विकास यात्रा का मुख्य आधार बना दिया है.
कोलकाता:
पश्चिम बंगाल की राजनीति और अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका बीते एक दशक में बेहद ही निर्णायक रूप से बदली है. आज महिलाएं महज मतदाता ही नहीं, बल्कि नीतियों की दिशा तय करने वाली सामाजिक और आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रही हैं. राज्य सरकार की कई लक्षित पहलों ने महिला सशक्तीकरण को कल्याण के दायरे से निकालकर राजनीतिक भागीदारी और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ा है.
ममता सरकार की योजनाओं का जमीनी असर
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में शुरू की गई योजनाओं का असर जमीनी स्तर पर साफ दिखता है. रूपश्री योजना के तहत अब तक 22.02 लाख महिलाओं को विवाह के समय 25,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी गई है. इस योजना पर राज्य सरकार 5,558.66 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है. सरकार का दावा है कि इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को सम्मानजनक शुरुआत का सहारा मिला है.


