मेडिकल टूरिज्म में भारत 10वें स्थान पर, 2024 में 6.44 लाख विदेशी मरीज पहुंचे

भारत मेडिकल टूरिज्म के वैश्विक पटल पर तेजी से अपनी मजबूत स्थिति बना रहा है, जहां कम लागत, उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएं और अनुभवी डॉक्टर आकर्षण का केंद्र हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल दावा कि “दुनिया के टॉप 5 मेडिकल टूरिज्म देशों में भारत शामिल है और हर साल 20 लाख से ज्यादा लोग इलाज करवाते हैं” आंशिक रूप से अतिरंजित है। मेडिकल टूरिज्म इंडेक्स 2024-25 के अनुसार, भारत 10वें स्थान पर है, जबकि टॉप 5 में थाईलैंड, मैक्सिको, तुर्की, कोस्टा रिका और सिंगापुर जैसे देश प्रमुख हैं।
2024 में भारत में मेडिकल टूरिज्म में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जब ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के आंकड़ों के मुताबिक 6,44,387 विदेशी मरीज इलाज के लिए पहुंचे, जो कोविड पूर्व के 5 लाख से अधिक था। जनवरी से अप्रैल 2025 तक ही 1,31,856 विदेशी मरीज आए, जो सालाना 4-5 लाख तक पहुंचने का संकेत देते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में 7.3 मिलियन ‘मेडिकल वैल्यू ट्रैवलर्स’ (MVTs) का जिक्र है, लेकिन इसमें मरीजों के साथ परिजन और सहयोगी भी शामिल हैं, न कि केवल इलाज करवाने वाले। 20 लाख का आंकड़ा वास्तविक मरीजों से मेल नहीं खाता।
भारत की लोकप्रियता के पीछे सस्ते हार्ट सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, कैंसर ट्रीटमेंट और आयुर्वेदिक चिकित्सा जैसे क्षेत्र हैं, जहां लागत अमेरिका-यूरोप से 70-80% कम है। सरकार ने ‘हील इन इंडिया’ अभियान चलाकर ई-वीजा, विशेष वीजा एक्सटेंशन और स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ावा दिया है। भविष्य में 2026 तक 10 लाख मरीजों का लक्ष्य है।



