चुनाव आयोग की नजर में बंगाल: डोमिसाइल के बाद जन्म-जाति प्रमाणपत्र पर सख्ती

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में डोमिसाइल प्रमाणपत्रों की जांच के बाद अब चुनाव आयोग ने जन्म प्रमाणपत्र और जाति प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पर भी निगरानी बढ़ा दी है। यह कदम मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फर्जी दस्तावेजों को रोकने के लिए उठाया गया है। आयोग का मानना है कि राज्य सरकार की ‘दुआरे सरकार’ योजना के तहत जारी कई प्रमाणपत्र बैकडेटेड और जाली हो सकते हैं।
बीजेपी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर जन्म, निवास, वन अधिकार, जाति, परिवार और भूमि प्रमाणपत्रों पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी थी। पार्टी का आरोप है कि 2020 से इन प्रमाणपत्रों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है, जो अवैध घुसपैठियों को नागरिकता का झूठा प्रमाण देने के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं।
इस जांच से सरकारी नौकरियों, आरक्षण और योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक हथियार बता रहा है। जुलाई 2025 के बाद जारी आवासीय प्रमाणपत्रों पर विशेष नजर रहेगी, और दावों-आपत्तियों की सुनवाई में कड़ी जांच होगी।


