जल्द ही टूट जायेगा राजद-कांग्रेस का गठजोड़, प्रदेश अध्यक्ष समेत नेताओं की बयानबाजी में दिख रहा…

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में दिख रही दरार एक बार फिर सामने आने लगी है। बिहार चुनाव में मिली करारी हार का ठीकरा अब महागठबंधन के घटक दल एक दूसरे सहयोगी दल पर फोड़ने में जुटे हैं जिसके बाद अब संकेत मिलना शुरू हो गया है कि राजद-कांग्रेस का गठबंधन बहुत ही जल्द टूट जायेगा। इस संबंध में दोनों ही पार्टियों के नेता आपस में एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप भी करने लगे हैं।
दरअसल नई दिल्ली में पार्टी आलाकमान ने जब बिहार के नेताओं और प्रत्याशियों के साथ समीक्षा बैठक की तो अधिकतम नेताओं ने राजद को हार का कारण बतायाl कांग्रेस के प्रत्याशियों ने राजद की खराब छवि का हवाला देते हुए बुरी हार से बचने और पार्टी की छवि बचाए रखने के लिए अलग अलग चुनावों में जाने की पैरवी की। कांग्रेस की समीक्षा बैठक में कांग्रेस नेताओं के रुख से राजद ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है जिसके बाद एक बार फिर कांग्रेस ने पलटवार किया और गठबंधन करने का कारण तक पूछ डाला।
राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने समीक्षा बैठक में राजद पर उठाये गए सवालों को लेकर कहा कि 2020 हो या 2025 कांग्रेस को जितने भी वोट या सीटें मिली वह राजद की वजह से। बिहार में राजद का अपना जनाधार है जिसका फायदा सभी घटक दलों को मिला है जबकि कांग्रेस का अपना कोई जनाधार नहीं है। राजद अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस ने अपनी औकात का विश्लेषण कर लिया है और अगर अलग होना चाहते हैं तो अच्छी बात है।
राजद प्रदेश अध्यक्ष के बयान पर अब कांग्रेस ने भी पलटवार किया है और सवाल किया कि अगर हमारा जनाधार नहीं है तो फिर पार्टियां हमारे साथ गठबंधन क्यों करती हैं। कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने कहा कि गठबंधन के सभी दलों को एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए। अगर वे सम्मान नहीं कर सकते हैं तो इसका मतलब है कि उन्हें गठबंधन धर्म की जानकारी नहीं है। वहीं कांग्रेस के एक अन्य प्रवक्ता ज्ञान रंजन ने राजद प्रदेश अध्यक्ष पर ही सवाल उठा दिया और कहा कि उन्हें अगर कुछ कहना है तो कोआर्डिनेशन कमिटी की बैठक में तेजस्वी यादव के सामने कहें, इस तरह से मीडिया में कुछ भी बयान देना सही नहीं है।



