वैश्विक तेल बाजार में फिर उथल-पुथल, भारत पर पड़ेगा असर

मध्य पूर्व में जारी तनाव और अमेरिकी तेल भंडार में कमी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम एक बार फिर बढ़ गए हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो पिछले तीन महीनों का उच्चतम स्तर है।
भारतीय तेल कंपनियों ने संकेत दिए हैं कि अगर यह स्थिति बनी रही तो घरेलू पेट्रोल-डीजल के दामों में भी बढ़ोतरी संभव है। विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर की मजबूती और आपूर्ति में रुकावट भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय है।
सरकार फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है और तेल विपणन कंपनियों से समीक्षा रिपोर्ट मांगी है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें और बढ़ीं तो त्योहारों के बाद ईंधन दरों में संशोधन किया जा सकता है।
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मुद्रास्फीति और परिवहन लागत पर सीधा प्रभाव डालेंगी, जिससे आने वाले महीनों में घरेलू बजट पर दबाव बढ़ सकता है।



