17 सेकंड vs 12 मिनट, अगली बार खेल खत्म समझो! एस्टोनिया की रूस को सीधी चेतावनी

रूस और नाटो के बीच जंग किसी भी पल छिड़ सकती है! ताजा झड़प एस्टोनिया और रूसी जेट्स के बीच हुई. एस्टोनिया ने दावा किया है कि तीन रूसी MiG-31 फाइटर जेट उसकी एयरस्पेस में 12 मिनट तक बिना इजाजत के घुसे रहे. यही नहीं, इन जेट्स के पास कोई फ्लाइट प्लान नहीं था, ट्रांसपोंडर बंद थे और उन्होंने एस्टोनियाई एयर ट्रैफिक कंट्रोल से कोई संपर्क नहीं किया. इसे सीधा उकसावे की कार्रवाई माना जा रहा है. एस्टोनिया की संसद की फॉरेन अफेयर्स कमेटी के चेयरमैन मार्को मिह्केलसन ने रूस को चेतावनी देते हुए कहा, ’17 सेकेंड बनाम 12 मिनट. अगली बार, हम वही करेंगे – अगर आपको बात समझ में आ गई हो तो.’
इशारा साफ था. दरअसल, 2015 में तुर्की ने 17 सेकंड की वॉर्निंग के बाद रूसी जेट गिराया था. एस्टोनिया अब कह रहा है कि हमने 12 मिनट तक इंतजार किया. अगली बार आपको समझ आ जाएगा कि इसका मतलब क्या है. यह बयान सीधे तौर पर मास्को के लिए अल्टीमेटम माना जा रहा है.
नाटो का इमरजेंसी कंसल्टेशन, ट्रंप बोले- मुझे यह सब अच्छा नहीं लगता
एस्टोनिया ने इस घटना के बाद नाटो को आर्टिकल 4 कंसल्टेशन के लिए अपील की है. इसका मतलब है कि 32 सदस्य देशों की तुरंत बैठक होगी और कलेक्टिव डिफेंस को लेकर अगला कदम तय किया जाएगा. यही आर्टिकल 4 पोलैंड ने भी 10 सितंबर को एक्टिवेट किया था, जब रूसी ड्रोन ने उसके एयरस्पेस का उल्लंघन किया था.
एस्टोनिया के प्रधानमंत्री क्रिस्टन मिखल ने साफ कहा, ‘नाटो का जवाब हर उकसावे पर यूनाइटेड और स्ट्रॉन्ग होना चाहिए. हम अपने सहयोगियों के साथ मिलकर अगला कदम तय करेंगे.’
नाटो की तरफ से इटली, फिनलैंड और स्वीडन ने तुरंत अपने जेट्स स्क्रैम्बल किए. वहीं, एस्टोनिया में तैनात इटैलियन F-35 फाइटर्स ने रूसी जेट्स को बाहर एस्कॉर्ट किया. नाटो प्रवक्ता ने इसे ‘रूस का लापरवाह व्यवहार’ बताया और कहा कि गठबंधन पूरी तरह रिस्पॉन्स देने में सक्षम है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना पर कहा, ‘मुझे यह पसंद नहीं है. जब ऐसा होता है तो मुझे अच्छा नहीं लगता. यह बड़ा झगड़ा खड़ा कर सकता है.’ वहीं, पोलैंड और रोमानिया जैसे नाटो देश पहले ही रूस पर अपने एयरस्पेस तोड़ने का आरोप लगा चुके हैं.
रूस ने पहले दी सफाई, एयरस्पेस वॉयलेशन से इंकार
रूस का कहना है कि उसके जेट्स ने किसी भी देश की सीमा का उल्लंघन नहीं किया. रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि जेट्स ‘शेड्यूल्ड फ्लाइट’ पर थे और न्यूट्रल बाल्टिक वॉटर के ऊपर से गुजरे. उनका दावा है कि वे एस्टोनिया के वाइंडलू आइलैंड से तीन किलोमीटर दूर रहे. मास्को ने इसे पश्चिमी देशों का ‘प्रोपेगेंडा’ करार दिया है.
तुर्की की 2015 वाली कार्रवाई का जिक्र क्यों?
यहां तुर्की की 2015 वाली घटना को याद करना जरूरी है. नवंबर 2015 में तुर्की ने अपने एयरस्पेस में सिर्फ 17 सेकंड की घुसपैठ पर रूसी Sukhoi Su-24M जेट गिरा दिया था. पायलट ओलेग पेशकोव की मौत हो गई थी और इस घटना के बाद रूस-नाटो रिश्ते ऐतिहासिक तनाव में चले गए थे. तुर्की ने कहा था कि उसने पायलट को 10 बार चेतावनी दी थी. अमेरिका ने भी तुर्की की बात की पुष्टि की थी.
इस घटना के बाद रूस ने सीरिया में अपनी सैन्य तैनाती और भी मजबूत कर दी थी. वहीं तुर्की ने अपनी बॉर्डर सिक्योरिटी के लिए KORAL रडार सिस्टम तैनात किया था. यही वजह है कि जब एस्टोनिया ने ’17 सेकंड बनाम 12 मिनट’ की बात कही, तो यह संकेत है कि अब धैर्य खत्म हो रहा है और अगली बार हालात बेहद खतरनाक हो सकते हैं.



