दिल्ली-एनसीआर की हवा सात साल से जहरीली, CSE रिपोर्ट में पीएम 2.5 स्तर पर गंभीर खतरा

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की हालिया रिपोर्ट में पता चला है कि पिछले सात वर्षों से (2019 से 2025 तक) दिल्ली-एनसीआर की सर्दियों की हवा लगातार जहरीली बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार पीएम 2.5 प्रदूषक का स्तर खतरनाक सीमा से कई गुना अधिक है, जो सांस लेने वालों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रहा है। इस दौरान अक्टूबर से नवंबर तक पीएम 2.5 का औसत स्तर 140 से 180 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के बीच रहा, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का सुरक्षित मानक केवल 2.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि पराली जलाने का योगदान कम होने के बावजूद वाहनों और स्थानीय प्रदूषण स्रोतों से हवा की गुणवत्ता खराब बनी हुई है। दिल्ली के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर चरम पर था, जिसमें द्वारका सेक्टर-8, जहांगीरपुरी और नॉर्थ कैंपस सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र रहे। डॉक्टरों ने बताया कि इससे सांस की बीमारियां बढ़ी हैं और अस्पतालों में सांस के रोगियों की संख्या 33 प्रतिशत तक बढ़ गई है।
CSE की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉयचौधरी ने कहा है कि प्रदूषण के खिलाफ केवल मामूली कदम अब काम नहीं करेंगे, गहरी संरचनात्मक और नीति स्तर पर बदलाव जरूरी हैं। उन्होंने विद्युत वाहन बढ़ाने, पुराने वाहनों को तुरंत हटाने, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और औद्योगिक उत्सर्जन कड़ाई से नियंत्रित करने की सुझाव दिया है।



