मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में समाज को एक कड़ी लेकिन जरूरी सलाह देते हुए कहा..

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में समाज को एक कड़ी लेकिन जरूरी सलाह देते हुए कहा कि छोटे-छोटे बच्चों को मोबाइल, टैबलेट और दूसरी तकनीकी चीज़ें पकड़ाना एक तरह से अपराध है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आज सबसे बड़ा खतरा यह है कि लोग दूधमुंहे और कम उम्र के बच्चों के हाथ में तकनीक थमा रहे हैं, जिससे उनका बचपन, उनकी सोच और उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।
सीएम योगी ने कहा कि बच्चों का स्वाभाविक विकास खेलने, पढ़ने और परिवार के साथ समय बिताने से होता है, न कि मोबाइल स्क्रीन से। उन्होंने जोर देकर कहा कि बच्चों को तकनीक का गुलाम बनाने के बजाय उन्हें किताबों से जोड़ना चाहिए। पढ़ने-लिखने की आदत, दोबारा पढ़ने (री-रीडिंग) की आदत और सीखी हुई बातों पर सोचने की क्षमता बच्चों में विकसित करनी बेहद जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आज कई माता-पिता बच्चों को चुप कराने या समय काटने के लिए मोबाइल थमा देते हैं, लेकिन वे यह नहीं समझते कि इससे बच्चे चिड़चिड़े, एकाकी और संवेदनहीन होते जा रहे हैं। उन्होंने इसे सामाजिक चिंता का विषय बताया और कहा कि अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाली पीढ़ी मानसिक और नैतिक रूप से कमजोर हो सकती है।अंत में मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को तकनीक नहीं, संस्कार दें, उन्हें किताबों, खेल और रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करें। यही बच्चे के उज्ज्वल भविष्य और मजबूत राष्ट्र की नींव है।



