बिहार

बिहार की इस मिठाई के विदेश तक दीवाने, नेपाल-भूटान तक फैली है इसकी मिठास l

सहरसा जिले के सिहौल गांव की प्रसिद्ध टिकरी मिठाई अपनी शुद्धता और पारंपरिक स्वाद के लिए जानी जाती है। यह बिहार के साथ-साथ नेपाल और भूटान तक लोकप्रिय हो गई है। शुद्ध दूध, खोया और देशी घी से बनी यह मिठाई उपहार के रूप में भी खूब पसंद की जाती है।

जागरण संवाददाता, सत्तरकटैया (सहरसा)। सहरसा जिले के सिहौल गांव की प्रसिद्ध टिकरी मिठाई अपनी शुद्धता, पारंपरिक स्वाद और गुणवत्ता के कारण अब केवल स्थानीय पहचान तक सीमित नहीं रही। बिहार के विभिन्न जिलों और अन्य राज्यों के साथ-साथ नेपाल एवं भूटान तक सिहौल की टिकरी की मिठास फैल चुकी है।

शुद्ध दूध, खोया और देशी घी से तैयार होने वाली यह टिकरी स्वाद में लाजवाब होती है। यही वजह है कि लोग इसे रिश्तेदारों के यहां भेजने के लिए उपहार (संदेश) के रुप में भी खूब पसंद करते हैं। सिहौल चौक स्थित मां गहिल मिष्ठान भंडार जैसी दुकानों ने इसकी शुद्धता और स्वाद को वर्षों से बरकरार रखा है, जिससे इसकी लोकप्रियता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

सिहौल की टिकरी पूरी तरह शुद्ध

दूध, खोया और देशी घी से बनाई जाती है। इसमें किसी प्रकार की मिलावट नहीं होने के कारण इसका स्वाद और गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है।

शुद्ध वजन और ताजगी इसकी पहचान है। सहरसा–सुपौल मुख्य मार्ग से गुजरने वाले यात्री अक्सर सिहौल चौक पर रुककर इस प्रसिद्ध टिकरी का स्वाद लेना और खरीदना नहीं भूलते।

*280 रुपये प्रति किलो में उपलब्ध*

दुकानदार बच्चन कामत बताते हैं कि वर्ष 1993 से वे सिहौल चौक पर कुल देवी मां गहिल के नाम से मिठाई की दुकान चला रहे हैं।

उन्होंने कहा, हम लोग सिर्फ शुद्ध दूध, खोया और देशी घी से ही मिठाई बनाते हैं। यही कारण है कि प्रत्येक दिन लगभग तीन क्विंटल बनता है। दूर-दूर से लोग हमारी टिकरी खाने आते हैं और इसे साथ ले जाते हैं।

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former crime reporter DAINIK JAGRAN 2001 and Special Correspondent SWATANTRA BHARAT Gorakhpur. Chief Editor SAAMYIK HANS Hindi News Paper/news portal/

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