पंजाब का बुजुर्ग भटककर पहुंचा बिहार, जेन-जी युवक ने एआई की मदद से खोजा गांव और 1200 किमी दूर छोड़कर आया!

पंजाब का बुजुर्ग भटककर पहुंचा बिहार, जेन-जी युवक ने एआई की मदद से खोजा गांव और 1200 किमी दूर छोड़कर आया
अमृतसर की भीड़भाड़ में एक बुजुर्ग अपनी तीर्थयात्रा के दौरान रास्ता भटक गए और करीब 1,200 किलोमीटर दूर बिहार के गया पहुंच गए। पंजाब के लुधियाना जिले के फतेहगढ़ गुजरान गांव के रहने वाले 71 वर्षीय चमन लाल लंबे समय से भूलने की समस्या से जूझ रहे हैं। वह पंजाब सरकार की तीर्थयात्रा योजना के तहत अमृतसर गए थे, लेकिन वहां से किसी तरह ट्रेन पकड़कर गया पहुंच गए।
गया में चमन लाल भूखे-प्यासे और बेसुध हालत में घूम रहे थे। इसी दौरान नीरज नाम के एक युवक की नजर उन पर पड़ी। नीरज ने उनकी मदद करने का फैसला किया और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। चमन लाल को केवल पंजाबी भाषा आती थी, जिसके कारण उनके परिवार और गांव का पता लगाना चुनौतीपूर्ण था। हालांकि, नीरज ने हिम्मत नहीं हारी और उनकी मदद करने का प्रयास जारी रखा।
इंटरनेट और ChatGPT की मदद से खोजा गांव
नीरज ने चमन लाल से मिली सीमित जानकारी और गांव के नाम के आधार पर इंटरनेट की मदद से खोजबीन शुरू की। भाषा की समस्या के बावजूद उन्होंने ChatGPT और अन्य ऑनलाइन माध्यमों का सहारा लिया। लगातार तीन दिनों की मेहनत के बाद नीरज को लुधियाना के पास स्थित फतेहगढ़ गुजरान गांव का सही पता मिल गया, जो मछवाड़ा साहिब क्षेत्र में है।
1,200 किलोमीटर दूर पहुंचाकर लौटाई परिवार की खुशी
गांव का पता मिलने के बाद नीरज ने चमन लाल को उनके घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उठाई। उन्होंने करीब 1,200 किलोमीटर की दूरी तय कर बुजुर्ग को उनके गांव पहुंचाया। नीरज की इस पहल ने न केवल एक बुजुर्ग को उनके परिवार से मिलाया, बल्कि यह भी दिखाया कि तकनीक के सही इस्तेमाल और इंसानियत की भावना से मुश्किल परिस्थितियों में भी मदद का रास्ता निकाला जा सकता है।



