दिल्ली-मुंबई का झंझट खत्म, बिहार से ही डायरेक्ट भरें सिंगापुर-बैंकॉक की उड़ान, नीतीश सरकार लेकर आई धांसू प्लान

बिहार के लोगों को अब विदेश जाने के लिए दिल्ली, मुंबई या कोलकाता का चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी. राज्य सरकार ने ऐसा फैसला लिया है जिससे अंतरराष्ट्रीय यात्रा न केवल आसान होगी बल्कि यात्रियों का समय और पैसा भी बचेगा. मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 26 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनमें से सबसे अहम फैसला हवाई संपर्क को लेकर था.
अब पटना और गया हवाई अड्डे से सीधे सिंगापुर, काठमांडू, बैंकॉक और अन्य देशों के लिए उड़ान भरना संभव होगा. फिलहाल बिहार के यात्रियों को विदेश जाने के लिए अक्सर दिल्ली या कोलकाता होकर ही उड़ान पकड़नी पड़ती है. इससे न केवल सफर लंबा होता है, बल्कि खर्च भी बढ़ जाता है.
सरकार की योजना और सब्सिडी
राज्य सरकार ने यह भी तय किया है कि पटना और गया से उड़ने वाली इंटरनेशनल फ्लाइट्स को बढ़ावा देने के लिए विमानन कंपनियों को आर्थिक मदद दी जाएगी. कैबिनेट के मुताबिक, अगर किसी इंटरनेशनल फ्लाइट में कम से कम 150 यात्री रहते हैं, तो सरकार एयरलाइंस को सब्सिडी देगी.
• पटना से काठमांडू जाने वाली फ्लाइट के लिए प्रति ट्रिप 5 लाख रुपये
• गया से शारजाह के लिए 10 लाख रुपये प्रति ट्रिप
• गया से सिंगापुर के लिए 10 लाख रुपये प्रति ट्रिप
• गया से कोलंबो के लिए भी 10 लाख रुपये प्रति ट्रिप
यह कदम बिहार से अंतरराष्ट्रीय यात्राओं को आसान बनाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है.
गया से शुरू होगी सीधी उड़ानें
पहले चरण में गया एयरपोर्ट से थाईलैंड, म्यांमार और श्रीलंका के लिए सीधी उड़ानों की सुविधा मिलेगी. वहीं पटना एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल का काम तेजी से चल रहा है और उम्मीद की जा रही है कि मार्च 2025 तक यहां से भी काठमांडू, सिंगापुर और बैंकॉक के लिए सीधी उड़ानें शुरू हो जाएंगी.
बड़ा बदलाव, बड़ी उम्मीदें
बिहार से हर साल बड़ी संख्या में लोग पढ़ाई, नौकरी और धार्मिक पर्यटन के लिए विदेश जाते हैं. बोधगया में बौद्ध तीर्थयात्रियों का आना-जाना भी लगा रहता है. अब जब पटना और गया से सीधे विदेश की उड़ानें मिलेंगी, तो इन यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी. यह फैसला बिहार की छवि बदलने में भी अहम भूमिका निभाएगा. जहां पहले अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए राज्यवासी दूसरे शहरों पर निर्भर थे, वहीं अब बिहार खुद एक हब के तौर पर विकसित होता दिखेगा.



