जम्मू-कश्मीर के एलजी ने कार्रवाई के बीच जम्मू में सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की l

जम्मू और कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने रविवार (23 नवंबर, 2025) को जम्मू में एक हाई-लेवल सिक्योरिटी रिव्यू मीटिंग की अध्यक्षता की। यह मीटिंग कश्मीर के लोकल लोगों के कथित तौर पर एक इंटर-स्टेट टेरर मॉड्यूल और लाल किले के पास हुए ब्लास्ट से जुड़े होने के मद्देनजर की गई।जम्मू कन्वेंशन सेंटर में हुई मीटिंग में आर्मी, J&K पुलिस, CRPF, इंटेलिजेंस एजेंसियों और सिविल एडमिनिस्ट्रेशन के टॉप अधिकारी शामिल हुए।
अधिकारियों ने बताया कि मिस्टर सिन्हा ने J&K में आतंकवादियों और उनके सपोर्टर्स की पहचान के लिए चल रहे सुरक्षा उपायों का जायज़ा लिया। मीटिंग में केंद्र शासित प्रदेश (UT) में इंटेलिजेंस इकट्ठा करने और टिप-ऑफ पर तुरंत कार्रवाई करने की अहमियत पर भी ज़ोर दिया गया।
कश्मीर के तीन डॉक्टरों समेत कम से कम आठ लोकल लोगों को एक इंटर-स्टेट टेरर मॉड्यूल और लाल किला ब्लास्ट के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया, जिसमें 15 आम लोग मारे गए थे।
इस साल कश्मीर में लोकल डॉक्टरों के कथित तौर पर टेरर ग्रुप में शामिल होने की घटनाओं में तेज़ी देखी गई है, इस ट्रेंड को सिक्योरिटी एनालिस्ट चिंता की बात मानते हैं। ऐसे ही एक डॉक्टर, पुलवामा के डॉ. उमर नबी पर आरोप है कि वह एक्सप्लोसिव से भरी कार लाल किले तक ले गए थे।
अधिकारियों ने कहा कि मिस्टर सिन्हा ने हाल के डेवलपमेंट के बाद J&K में सिक्योरिटी एजेंसियों द्वारा किए गए नए सिक्योरिटी उपायों का भी जायजा लिया। चर्चा में अंदरूनी इलाकों और लाइन ऑफ़ कंट्रोल (LoC) पर सिक्योरिटी उपायों को मज़बूत करने पर भी बात हुई।
कश्मीर में लाल किला ब्लास्ट के बाद 600 से ज़्यादा लोकल लोगों को हिरासत में लिया गया और पाकिस्तान और पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर (POK) में रहने वाले J&K के कई लोगों के घर अटैच कर लिए गए। फर्टिलाइज़र बेचने वालों और कार डीलरों पर भी कार्रवाई तेज़ कर दी गई है।



