Uk: सेहत का खजाना नीरा का गुड़ हो रहा विलुप्ति, खजूर के पेड़ों की घटती संख्या बनी कारण

काशीपुर में कड़ी मशक्कत के बाद तैयार होने वाला नीरा का गुड़ अब उत्तराखंड से धीरे-धीरे विलुप्त हो रहा है। आबादी क्षेत्र बढ़ने व विकास कार्यों की सूली चढ़ने के कारण खजूर के पेड़ों की संख्या में काफी गिरावट आई है। ऐसे में पारंपरिक तरीके से गुड़ तैयार करने वालों की संख्या में भी कम होती जा रही है।
वहीं, दिन भर की मेहनत के बाद भी कमाई सिर्फ चंद रुपये होने के कारण नई पीढ़ी को परिजन इस कार्य से दूर कर रहे हैं। उत्तराखंड में काशीपुर में नीरा का रस निकालने व गुड़ तैयार करने का काम सबसे बड़े पैमाने पर होता है। वर्ष 1965 में यहां नीरा का रस निकालकर गुड़ बनाने की शुरुआत हुई थी।
पहले इस कार्य से कई परिवार जुड़े थे लेकिन धीरे-धीरे विकास कार्यों के चलते सड़क व रेलवे लाइन किनारे लगे इन पेड़ों का काट दिया गया। करीब 30 वर्ष पहले खजूर के पेड़ों की संख्या पांच हजार के करीब थी, अब हजार रह गई है। ऐसे में नीरा का रस निकालने वाले भी कम हो गए हैं।



