अंतरराष्ट्रीय

अमेरिका की आर्थिक नीतियों पर बढ़ता विवाद: भारत पर लगाए गए ट्रंप के टैरिफ से अमेरिकी उद्योग और उपभोक्ताओं को भारी नुकसान

अमेरिका ने भारत पर हाल ही में टैरिफ लगाने की नीति अपनाई, जिसे लेकर देश में और विश्व स्तर पर खूब चर्चा हो रही है। हालांकि इस कदम का मकसद भारत के साथ व्यापार घाटे को कम करना बताया गया, लेकिन कई विशेषज्ञ और पूर्व अमेरिकी अधिकारी इस नीति के खिलाफ खड़े हो गए हैं। उनका कहना है कि इन टैरिफ की मार सबसे ज्यादा अमेरिका की अपनी अर्थव्यवस्था पर पड़ रही है, न कि भारत पर।

पूर्व अमेरिकी आर्थिक अधिकारी ने खुलकर कहा है कि ट्रंप प्रशासन की ये व्यापार नीतियां अमेरिका को विश्व स्तर पर अकेला कर सकती हैं। उन्होंने राष्ट्रपति को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि इस तरह के टैरिफ लगाने से न केवल भारत के साथ रिश्ते प्रभावित होंगे, बल्कि अमेरिकी कंपनियों को भी उत्पादन लागत में वृद्धि और बाजार में प्रतिस्पर्धा कम होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के ये कदम वैश्विक व्यापार सहयोग को कमजोर कर सकते हैं और लंबे समय में अमेरिकी उपभोक्ताओं और निवेशकों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। भारत ने भी इस नीति का सख्ती से विरोध किया है और WTO समेत विभिन्न मंचों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।

यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि मजबूत आर्थिक साझेदारी और सतत व्यापार संवाद ही भविष्य में दोनों देशों के लिए लाभकारी रहेंगे। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर व्यापारिक नीतियां बनाना अमेरिका के लिए ज्यादा फायदेमंद होगा।

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former crime reporter DAINIK JAGRAN 2001 and Special Correspondent SWATANTRA BHARAT Gorakhpur. Chief Editor SAAMYIK HANS Hindi News Paper/news portal/

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