Saudi Crude Price Hike: सऊदी अरब ने चौंकाया, कच्चे तेल की कीमत में अचानक कर दी रिकॉर्ड बढ़ोतरी, भारत के लिए मतलब!

Saudi Crude Price Hike: सऊदी अरब ने चौंकाया, कच्चे तेल की कीमत में अचानक कर दी रिकॉर्ड बढ़ोतरी, भारत के लिए मतलब
Saudi Abarbia Crude Price Hike: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच सऊदी अरब ने चौंकाया है। उसने अपने लाइट क्रूड के दाम भारी प्रीमियम पर तय किए हैं। स्टैंडर्ड क्रूड के मुकाबले कीमतें 19.50 डॉलर ऊपर रखी गई हैं। उसकी दरें एशियाई खरीदारों के लिए लागू होंगी। इसका भारत पर भी असर पड़ने की आशंका है।
सऊदी अरब ने एशियाई खरीदारों के लिए अपने फ्लैगशिप क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमत में भारी बढ़ोतरी की है। इससे इसकी कीमत अब तक के सबसे ऊंचे प्रीमियम स्तर पर पहुंच गई है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि ईरान युद्ध के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट्स लगातार अस्थिर बने हुए हैं।
दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने सोमवार को बड़ी घोषणा की। उसने कहा कि मई महीने के लिए एशिया में उसके ‘अरब लाइट क्रूड’ (सऊदी अरब से मिलने वाले तेल का एक खास ग्रेड) की बिक्री कीमत बेंचमार्क कीमत से 19.50 डॉलर प्रति बैरल ज्यादा होगी। ‘अरब लाइट’ के लिए अब तक का यह सबसे ज्यादा प्रीमियम है।
हालांकि, यह उतना ज्यादा नहीं है जितना कि कई बाजार विशेषज्ञों ने पिछले महीनों के रुझानों को देखते हुए अनुमान लगाया था। उनका अनुमान था कि यह 40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।
छठे हफ्ते में पहुंचा मिडिल-ईस्ट संघर्ष
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मिडिल-ईस्ट का संघर्ष अपने छठे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इससे शिपिंग मार्ग और होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते होने वाली तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सप्ताहांत में नई चेतावनियां जारी की थीं। धमकी दी थी कि अगर होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला गया तो वह ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों पर हमला कर देंगे।
ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा था, ‘मंगलवार का दिन ईरान के लिए ‘बिजली संयंत्र दिवस’ और ‘पुल दिवस’ होगा- ये दोनों ही एक ही दिन में होंगे। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ होगा!!!’
ईरान ने भी इसका कड़ा जवाब देते हुए चेतावनी दी है कि उसके बुनियादी ढांचे पर होने वाले किसी भी हमले का जवाब उसी तरह से दिया जाएगा।
भारत के लिए सऊदी अरब के कदम का मतलब
सऊदी अरब की ओर से कच्चे तेल की कीमतों में की गई बढ़ोतरी भारत के लिए चुनौती है। इसके पीछे कई वजहें हैं:
भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85% से 90% आयात करता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में उछाल से भारत का आयात बिल और राजकोषीय घाटा तेजी से बढ़ सकता है।
इससे भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले और कमजोर हो सकता है।
इसका सीधा असर देश में माल ढुलाई की लागत पर पड़ने के आसार हैं।
इसके चलते फल, सब्जियों और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।
अगर ऐसा होता है तो खुदरा महंगाई का दबाव आम आदमी की जेब पर साफ महसूस होगा।
कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर कायम
संघर्ष शुरू होने के बाद से ही तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से काफी ऊपर बनी हुई हैं।
सोमवार को दाम
‘वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट’ (WTI) की कीमत 1.86% बढ़कर 113.62 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
‘ब्रेंट क्रूड’ की कीमत 1.16% बढ़कर 110.30 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
पिछले गुरुवार को डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत में 11% से ज्यादा और ब्रेंट क्रूड की कीमत में लगभग 8% की उछाल देखने को मिली थी। इसकी मुख्य वजह ये संकेत थे कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रह सकती है। नतीजतन, कच्चे तेल की कीमतों में अचानक हुई इस बढ़ोतरी के कारण पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं।
ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे उन ग्लोबल इकोनॉमिक मॉडलों पर और भी ज्यादा बोझ पड़ रहा है जो पहले से ही चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। वे मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण सप्लाई और सेवाओं की बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं।



