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मातोश्री की चौखट पर फ‍िर पहुंची कांग्रेस, उद्धव ठाकरे से मिलाया हाथ, पूरी होगी राहुल गांधी की मंशा

राजनीति में न कोई स्थाई दोस्त होता है और न कोई दुश्मन, सिर्फ ‘मौका’ होता है. महाराष्ट्र के चंद्रपुर निकाय चुनाव में यह कहावत एक बार फिर सच साबित हुई है. जो कांग्रेस और उद्धव ठाकरे गुट चुनाव से ठीक पहले एक-दूसरे को आंखें दिखा रहे थे, अलग-अलग चुनाव लड़ने का दम भर रहे थे, नतीजे आते ही कुर्सी की खातिर पुराने गिले-शिकवे भूलकर फिर गले मिल गए हैं. चुनाव से पहले कांग्रेस ने उद्धव का साथ छोड़कर ‘एकला चलो’ की राह चुनी थी, लेकिन जब नतीजों में जादुई आंकड़ा नहीं मिला, तो पार्टी के सुर बदल गए और सत्ता के लिए फिर उसी ‘मातोश्री’ का दरवाजा खटखटाया, जिससे कुछ दिन पहले उन्होंने दूरी बना ली थी

चंद्रपुर महानगर पालिका चुनाव से पहले कांग्रेस ने महाविकास आघाडी (MVA) से अलग होकर चुनाव लड़ने का फैसला किया था. तब कांग्रेस नेताओं का मानना था कि वे अपने दम पर सत्ता हासिल कर लेंगे. इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बयानबाजी भी हुई, जिससे लगा था कि इनकी राहें अब जुदा हो चुकी हैं. लेकिन चुनाव नतीजों ने कांग्रेस के ‘एकला चलो’ के दावे को पलट दिया. त्रिशंकु जनादेश और पार्टी के भीतर दो गुटों की खींचतान ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी कि सत्ता हाथ से फिसलती दिखने लगी. भाजपा को सत्ता से दूर रखने और अपनी साख बचाने के लिए कांग्रेस को मजबूरी में यू-टर्न लेना पड़ा. कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार को अंततः मुंबई स्थित ‘मातोश्री’ जाकर उद्धव ठाकरे से मदद मांगनी पड़ी.

मातोश्री में ‘डील’ पक्की: ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला

जिस गठबंधन को चुनाव से पहले तोड़ दिया गया था, उसे ‘सत्ता की मलाई’ खाने के लिए फिर से जोड़ लिया गया है. विजय वडेट्टीवार और उद्धव ठाकरे के बीच हुई बैठक में नई ‘डील’ फाइनल हुई है. उद्धव गुट कांग्रेस को समर्थन देने के लिए तैयार हो गया है. शर्त ये है क‍ि महापौर का पद रोटेशन में होगा. यानी ढाई साल कांग्रेस का मेयर रहेगा और बाकी समय उद्धव गुट या सहयोगी को मौका मिल सकता है. साथ ही स्थायी समिति के पद भी बांटे जाएंगे.

संजय राउत की सफाई: ‘साथ लड़ना मजबूरी है’

गठबंधन टूटने और फिर जुड़ने पर जब सवाल उठे, तो संजय राउत ने इसे ‘राजनीतिक जरूरत’ बताया. उन्होंने सफाई देते हुए कहा, “भले ही हमने चुनाव अलग-अलग लड़े, लेकिन हमारा मुख्य मुकाबला भाजपा से है. अकोला और परभणी में हम साथ हैं. चंद्रपुर में भी अगर हम साथ नहीं आए, तो भाजपा इसका फायदा उठाएगी. राउत ने यह भी दावा किया कि चुनाव अलग लड़ने के बावजूद उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस के खिलाफ कोई जहर नहीं उगला था, इसलिए साथ आने में कोई नैतिक समस्या नहीं है. हालांकि, हकीकत यह है कि चुनाव के दौरान जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच काफी कड़वाहट देखी गई थी

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former crime reporter DAINIK JAGRAN 2001 and Special Correspondent SWATANTRA BHARAT Gorakhpur. Chief Editor SAAMYIK HANS Hindi News Paper/news portal/

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