दाऊद इब्राहिम को ISI ने कैसे बनाया अपना गुर्गा? वो कहानी जिसने आतंकवाद-अंडरवर्ल्ड का बनाया कॉकटेल

दाऊद इब्राहिम को ISI ने कैसे बनाया अपना गुर्गा? वो कहानी जिसने आतंकवाद-अंडरवर्ल्ड का बनाया कॉकटेल
दाऊद इब्राहिम से शुरू हुआ अंडरवर्ल्ड और आतंकवाद का कनेक्शन मुन्ना झिंगाड़ा तक पहुंच गया है. लालच में आकर ये अपराधी देश के गद्दार बन जा रहे हैं और अपने ही लोगों के खून से खेलने की साजिश का हिस्सा बन रहे हैं.
दुश्मन का दुश्मन अपना दोस्त होता है.” खुफिया एजेंसियों के लिए ये कहावत किसी ब्रह्मवाक्य से कम नहीं. दुनिया की तमाम खुफिया एजेंसियों की प्लेबुक में एक बात आम है – अगर किसी देश में अस्थिरता पैदा करनी है, वहां हिंसा करवाना है और उस देश की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था को तहस नहस करना है तो उन लोगों से हाथ मिलाओ जो संगठित आपराधिक गिरोह चलाते हैं, चरमपंथी हों और सरकार के खिलाफ काम करते हों. अमरीकी खुफिया एजेंसी CIA ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से, विशेषकर शीतयुद्ध के दौरान, दुनिया के कई देशों में इस नीति का खूब इस्तेमाल किया. पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई, जिसे 1980 के बाद कई सालों तक सीआईए ने ही ट्रेनिंग दी, ये नीति भारत के खिलाफ अपनाते आई है.
दाऊद और आईएसआई की दोस्ती कैसे हुई?
दाऊद 1986 में मुंबई से दुबई भाग गया और वहीं से समुद्र और हवाई रास्ते से सोने, चांदी और इलेक्ट्रॉनिक सामान की तस्करी करवाता था. जनवरी 1993 में दुबई से मुंबई के करीब रायगढ़ तट के लिए निकली तस्करी की एक बोट को कराची के तट के पास से गुजरते वक्त एक पाकिस्तानी गिरोह ने कब्जा कर लिया. बोट में करीब 2 करोड़ रुपये की चांदी थी, जो कि उस वक्त बहुत बड़ी रकम थी. दाऊद को बहुत बड़ा नुकसान हुआ. उसके नुकसान की जानकारी आईएसआई तक पहुंची. दुबई में उसके एजेंट दाऊद से मिले और कहा कि वे पाकिस्तानी माफिया से उसका माल छुड़ा देंगे, लेकिन उसके लिए एक शर्त रखी.



