कर्नाटक ने केरल के राज्यपाल से मलयालम भाषा विधेयक को खारिज करने की अपील की

कर्नाटक-केरल संबंधों में एक और विवाद जुड़ते हुए कर्नाटक सरकार ने मलयालम भाषा विधेयक, 2025 पर आपत्ति जताई है और केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से इसे खारिज करने का आग्रह किया है। कर्नाटक ने इस विधेयक को “असंवैधानिक” बताया है और कहा है कि यह केरल में रहने वाले कन्नड़-भाषी भाषाई अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से सीमा से सटे कासरगोड ज़िले में रहने वाले लोगों के हितों के खिलाफ है।
कर्नाटक सरकार की ओर से कर्नाटक सीमा क्षेत्र विकास प्राधिकरण के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को कासरगोड में राज्यपाल से मुलाकात की और उन्हें इस विधेयक को अस्वीकार करने की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा। प्राधिकरण ने अपनी याचिका में मांग की है कि कासरगोड ज़िले को इस विधेयक के दायरे से बाहर रखा जाए, क्योंकि वहाँ की 70% से अधिक आबादी कन्नड़ भाषा बोलती है।
यह विधेयक केरल के सभी स्कूलों में मलयालम को अनिवार्य पहली भाषा बनाता है। गौरतलब है कि इसी तरह का एक विधेयक वर्ष 2017 में पारित किया गया था, जिसे राष्ट्रपति द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था।



