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यूपी की वो 84 सीटें जिन पर अखिलेश यादव की निगाहें, बनाया खास प्लान, बसपा और बीजेपी की बढ़ी टेंशन

2027 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने के लिए समाजवादी पार्टी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही. यूपी में कमजोर पड़ी बसपा के वोटबैंक पर अखिलेश यादव ने नजर गड़ा दी है. 2027 के चुनाव में समाजवादी पार्टी एक बार फिर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में जुट गई है. पार्टी का मुख्य फोकस दलित वोटबैंक को अपनी ओर आकर्षित करने पर है, जो पारंपरिक रूप से बहुजन समाज पार्टी का मजबूत आधार रहा है.

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जो रणनीति बनाई है उसके मुताबिक आगामी 2027 विधानसभा चुनावों में पार्टी सामान्य सीटों पर भी दलित समुदाय के उम्मीदवारों को बड़े पैमाने पर टिकट देकर जातीय समीकरणों को पलटने की कोशिश करेगी. यह रणनीति सपा प्रमुख अखिलेश यादव की ‘पीडीए’ (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले का हिस्सा है. अखिलेश यादव को लगता है कि अगर बसपा के कोर वोट बैंक को पाले में कर लिया तो सत्तारूढ़ भाजपा को उखाड़ फेंकना आसान होगा.

पीडीए ही यूपी का भविष्य

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सपा 2024 लोकसभा चुनावों में मिली जीत व हारी हुई सीटों से सबक लेते हुए 2027 के लिए अभी से जमीन तैयार कर रही है. लोकसभा चुनावों में दलित वोटों का एक हिस्सा सपा की ओर खिसका था, लेकिन विधानसभा चुनावों में इसे मजबूत करने के लिए सामान्य सीटों पर दलित चेहरों को मैदान में उतारने का प्लान है. इससे न केवल दलित मतदाताओं में विश्वास बढ़ेगा, बल्कि गठबंधन की संभावनाओं को भी बल मिलेगा. अखिलेश यादव ने हाल ही में कहा था कि “पीडीए ही यूपी का भविष्य है”, और इस रणनीति से पार्टी पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों को एकजुट करने की कोशिश कर रही है.

84 सीटों पर खास नजर

सपा की इस योजना से यूपी की जातीय राजनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है. वर्तमान में यूपी विधानसभा में 403 सीटें हैं, जिनमें 84 आरक्षित (एससी) हैं. लेकिन सपा सामान्य सीटों पर भी दलित उम्मीदवारों को उतारकर बसपा के वोटबैंक में सेंध लगाने की तैयारी में है. पार्टी ने 2025 से ही ‘पीडीए चर्चा’ कार्यक्रम शुरू किए हैं, जो सभी 403 विधानसभाओं में चलाए जा रहे हैं. इनमें दलित समुदाय के मुद्दों पर फोकस किया जा रहा है, जैसे शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय.

जोखिम भरा हो सकता है दांव

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दांव सपा के लिए जोखिम भरा भी हो सकता है, क्योंकि सामान्य सीटों पर दलित उम्मीदवारों को उतारने से ऊपरी जातियों के वोट खिसक सकते हैं. हालांकि, 2024 लोकसभा चुनावों में दलित वोटों के कुछ हिस्से ने सपा का साथ दिया था, जिससे पार्टी उत्साहित है. सपा की यह रणनीति यूपी की सियासत को नई दिशा दे सकती है. आने वाले महीनों में पार्टी के इस प्लान पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी.

saamyikhans

former crime reporter DAINIK JAGRAN 2001 and Special Correspondent SWATANTRA BHARAT Gorakhpur. Chief Editor SAAMYIK HANS Hindi News Paper/News Portal

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