चलती ट्रेन में जन्मी बच्ची! इंसानियत की अनुपम मिसाल, 5 मिनट में ऐसे हुई सुरक्षित डिलीवरी

भुज-बरेली एक्सप्रेस में रविवार सुबह उस समय मानवता का अनोखा नजारा देखने को मिला जब अलवर से जयपुर की ओर आ रही ट्रेन में एक गर्भवती महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा होने लगी. महिला की हालत गंभीर देख सहयात्रियों का दिल पसीज गया और सभी ने मिलकर उसकी मदद की. महिला का नाम रेशमा और उम्र करीब 30 वर्ष है, जो अपने पति के साथ यात्रा कर रही थी. जैसे ही उसे दर्द हुआ, डिब्बे में चीखें गूंजीं.
तुरंत कृषि विभाग राजस्थान के कर्मचारी संजय बुंदेला, महुआ सीएचसी की स्टाफ नर्स ममता मीणा और ट्रेन का टीटी रमेश बैरवा आगे आए. ममता मीणा ने तुरंत अपनी नर्सिंग की ट्रेनिंग का इस्तेमाल करते हुए डिलीवरी की तैयारी शुरू की. संजय बुंदेला और रमेश बैरवा ने डिब्बे में मौजूद लोगों से सहयोग मांगा. आस-पास की महिलाओं ने फौरन अपनी चुन्नी, लुगड़ी और दुपट्टे से चारों तरफ पर्दा लगा दिया, ताकि माहौल सुरक्षित रहे.
जच्चा-बच्चा दोनों हैं सुरक्षित
यात्रियों ने अपने स्तर पर पूरी मदद की. किसी ने पानी पहुंचाया, किसी ने साफ कपड़ा. सिर्फ 5 मिनट के अंदर ही ममता मीणा की देखरेख में रेशमा ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दे दिया. डिब्बे में तालियों की गूंज और आशीर्वाद की आवाजें गूंज उठीं. बच्ची के रोने की आवाज सुनते ही सभी यात्रियों के चेहरे पर खुशी छा गई. डिलीवरी के तुरंत बाद दौसा रेलवे स्टेशन पर पहले से सूचना दे दी गई थी. जैसे ही ट्रेन रुकी, 108 एंबुलेंस तैयार खड़ी थी. मां-बेटी को तुरंत दौसा जिला अस्पताल भिजवाया गया, जहां दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं.
यात्रियों ने नवजात को दिया आर्शिवाद
यात्रियों ने नवजात बच्ची को आशीर्वाद दिया और कुछ ने पैसे भी भेंट किए. संजय बुंदेला ने कहा कि ये इंसानियत का पल था, सबने मिलकर एक जान बचाई. नर्स ममता मीणा ने बताया कि ट्रेन में संसाधन कम थे, लेकिन सबका साथ देखकर हौसला बढ़ा. टीटी रमेश बैरवा ने रेलवे कंट्रोल को तुरंत सूचना देकर एंबुलेंस का इंतजाम करवाया. इस घटना की सोशल मीडिया पर खूब तारीफ हो रही है. रेशमा के पति ने सभी सहयात्रियों का आभार जताते हुए कहा कि मेरी बेटी को दूसरा जन्म इन लोगों ने दिया है.एक चलती ट्रेन ने आज सिर्फ सफर नहीं, बल्कि इंसानियत की मिसाल कायम की.



