एमबीबीएस इंटर्न्स व रेजिडेंट्स के लिए सात दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

*मेडिकल कॉलेज के ईश्वर शरण अस्पताल में मरीज सुरक्षा, डॉक्यूमेंटेशन और क्लीनिकल स्किल्स पर कार्यशाला में हुई चर्चा*
*गोंडा*
गोंडा। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, गोंडा में बुधवार से “पेशेंट सेफ्टी, डॉक्यूमेंटेशन एंड क्लीनिकल स्किल्स” विषय पर सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। यह प्रशिक्षण 12 से 18 नवंबर तक प्रतिदिन सायं 4 से 5:30 बजे तक कॉलेज के लेक्चर थिएटर-1 में आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम का उद्घाटन महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. डॉ. धनंजय श्रीकांत कोटास्थाने ने किया। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य युवा चिकित्सकों में रोगी सुरक्षा, नैतिक आचरण और सटीक डॉक्यूमेंटेशन की समझ विकसित करना है। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में सटीक रिकॉर्ड कीपिंग और संवेदनशील रोगी प्रबंधन स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं।
प्रथम दिवस पर प्रो. एजाज अहमद, विभागाध्यक्ष जनरल मेडिसिन ने “रिकॉर्ड कीपिंग और डॉक्यूमेंटेशन के महत्व” विषय पर व्याख्यान दिया। इसके बाद सीएमएस डॉ अनिल तिवारी एवं एमएस डॉ डीएन सिंह ने “अस्पताल प्रशासन, अनुशासन और चिकित्सकीय जिम्मेदारियों” पर चर्चा की।
प्रशिक्षण के आगामी सत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सक विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन देंगे, जिनमें ट्रॉमा पेशेंट्स का मूल्यांकन, मेडिकोलीगल डॉक्यूमेंटेशन, सीपीआर और डेथ सर्टिफिकेट फॉर्म की प्प्रक्रिया, एक्यूट एब्डॉमिन, रेस्पिरेटरी व कार्डियक इमरजेंसी का प्रबंधन, सीजर, सीवीए और पीडियाट्रिक इमरजेंसी की हैंडलिंग, ब्लड ट्रांसफ्यूजन तथा फ्लूइड एंड इलेक्ट्रोलाइट मैनेजमेंट शामिल हैं। प्रशिक्षण के अंतिम दिन डॉ. नूपुर पॉल, विभागाध्यक्ष मनोचिकित्सा, “ब्रेकिंग द बैड न्यूज” विषय पर सत्र लेंगी, जिसमें चिकित्सकों को रोगी परिजनों से संवेदनशील संवाद की कला सिखाई जाएगी।
कार्यक्रम का संचालन और समन्वय डॉ. कुलदीप पांडे, डॉ. मुसाफिर सुहैल, डॉ. राहुल जायसवाल, डॉ. निशांत पांडेय, डॉ. ब्रजेश कुमार मिश्रा, तथा डॉ. विकास कुमार, डॉ अरुण मिश्रा, डॉ निशांत पांडे, डॉ जिआउल इस्लाम सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ शिक्षकों द्वारा किया जा रहा है। महाविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस प्रशिक्षण में सभी इंटर्न्स, ईएमओ और नॉन-पीजी रेजिडेंट्स की उपस्थिति अनिवार्य है। अनुपस्थित पाए जाने पर किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी। प्रधानाचार्य प्रो. डॉ. धनंजय श्रीकांत कोटास्थाने ने कहा कि यह प्रशिक्षण युवा चिकित्सकों को न केवल चिकित्सकीय दृष्टि से दक्ष बनाएगा, बल्कि उन्हें मानवीय संवेदनाओं और रोगी सुरक्षा की भावना से भी जोड़ने का कार्य करेगा।



