नेपाल जैसा हाल करने का देख रहे थे ख्वाब! Gen-Z ने राहुल को दे दिया करारा जवाब

नई पीढ़ी को मालूम है कि कब, किसे, कौन सा सिग्नल देना है. दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव इसका ताजा उदाहरण है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जिस Gen-Z को लोकतंत्र का रक्षक और सत्ता परिवर्तन का हथियार बताया था, उसी Gen-Z ने उन्हें कड़वा सच दिखा दिया. राहुल गांधी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया था, ‘देश का युवा, देश का छात्र, Gen-Z संविधान को बचाएगा, लोकतंत्र की रक्षा करेगा और वोट चोरी को रोकेगा. मैं हमेशा उनके साथ हूं.’ इस संदेश के पीछे साफ रणनीति थी. पड़ोसी नेपाल और बांग्लादेश में युवाओं के आंदोलनों ने सत्ता को झुकाया, वहां की सरकारें हिल गईं. राहुल भी भारत में उसी लहर को हवा देना चाहते थे. लेकिन डूसू के नतीजों ने उनकी थ्योरी को ध्वस्त कर दिया.
डूसू चुनाव 2025 के नतीजों में ABVP का दबदबा
शुक्रवार को DUSU चुनाव के नतीजे आए. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने चार में से तीन अहम पद जीत लिए. अध्यक्ष पद पर आर्यन मान, सचिव पद पर कुणाल चौधरी और संयुक्त सचिव पद पर दीपिका झा ने जीत हासिल की. केवल उपाध्यक्ष पद NSUI के खाते में गया. मतगणना सुबह 8 बजे से शुरू हुई. ABVP ने शुरुआत से बढ़त बनाई और आखिरी दौर तक उसे कायम रखा. NSUI अध्यक्ष पद पर बुरी तरह हार गई. इस जीत ने यह साफ कर दिया कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के Gen-Z ने राहुल गांधी की सोच को नकार दिया है.
हार के बचाव में क्या बोली NSUI?
NSUI उपाध्यक्ष पद की जीत को अपनी उपलब्धि बता रही है. संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने दावा किया कि यह जीत ABVP ही नहीं बल्कि सरकार, प्रशासन और पुलिस जैसी ताकतों के खिलाफ भी है. उन्होंने ईवीएम में धांधली के आरोप लगाए और कहा कि NSUI छात्रों के मुद्दों पर हमेशा खड़ी रहेगी. लेकिन हकीकत यह है कि कांग्रेस की छात्र इकाई लगातार कमजोर हो रही है. राहुल गांधी चाहे Gen-Z को कितना भी रक्षक बताएं, लेकिन ग्राउंड पर युवा वोट कांग्रेस से दूर खिसक रहा है.
DUSU का नतीजा कांग्रेस के लिए चेतावनी
राहुल गांधी की राजनीति अब सीधे युवाओं को टारगेट कर रही है. पावरप्वॉइंट प्रजेंटेशन, इंस्टाग्राम रील्स… सब कांग्रेस की बदली रणनीति का नतीजा है. नेपाल और बांग्लादेश के उदाहरण देकर राहुल देश के युवाओं को आंदोलन की ताकत का एहसास दिलाना चाहते हैं. लेकिन भारत की Gen-Z अभी भी राजनीति में ज्यादा स्थिरता चाहती है. डूसू चुनाव इसका ताजा सबूत है.
राजनीतिक पंडित मानते हैं कि राहुल गांधी का संदेश सिर्फ भावनात्मक नहीं था, बल्कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखकर दिया गया था. लेकिन डूसू चुनाव में ABVP की बड़ी जीत ने उनकी योजना पर पानी फेर दिया. नतीजों से साफ है कि राहुल गांधी जिस Gen-Z के सहारे सत्ता पलटने का सपना देख रहे थे, वह उनके साथ खड़ा नहीं है.
राहुल गांधी के लिए डूसू का नतीजा चेतावनी है. केवल सोशल मीडिया पोस्ट से युवा नहीं जुड़ते. जमीन पर संगठन चाहिए, भरोसा चाहिए, और मेहनत चाहिए. नेपाल और बांग्लादेश की तरह भारत में हालात नहीं हैं. यहां की Gen-Z भावनाओं से ज्यादा काम और नतीजे देखती है. डूसू चुनाव ने बता दिया कि राहुल गांधी का Gen-Z वाला कार्ड भी बेअसर है. Gen-Z ने उन्हें करारा जवाब दे दिया है और यह संदेश दूर तक जाएगा.
राहुल की हुंकार पर बीजेपी का पलटवार
भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी को घेरने में वक्त नहीं गंवाया. सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, ‘Gen-Z परिवारवाद के खिलाफ है. नेहरू, इंदिरा, राजीव, सोनिया के बाद राहुल को क्यों बर्दाश्त करेगा?’ उन्होंने तंज कसा कि जो युवा भ्रष्टाचार और वंशवाद से नफरत करता है, वह कांग्रेस का साथ क्यों देगा.
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तो राहुल पर गृहयुद्ध भड़काने का आरोप तक लगा दिया. उन्होंने कहा कि राहुल हताश हो चुके हैं, कभी मोदी की नकल करते हैं, कभी ‘Gen-Z’ की दुहाई देते हैं. रविशंकर प्रसाद ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं.



