
हिंदू धर्म में पितरों की मुक्ति और श्राद्ध कर्म से जुड़ा पितृ पक्ष चल रहा है और 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध पक्ष का समापन हो जाएगा. इसके बाद 22 सितंबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत भी हो जाएगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान नई चीजों की खरीदारी करने से बचना चाहिए. हालांकि, परंपरा और मान्यताओं से दूर हटके युवाओं के बीच नई आईफोन-17 सीरीज को लेकर गजब का उत्साह देखने को मिला. भारत में इस नई आईफोन सीरीज की सेल शुक्रवार से शुरू हो चुकी है. इसी क्रम में देश में मौजूद एप्पल बीकेसी स्टोर पर खरीदारों की भीड़ लग गई.
खरीदारी को लेकर मान्यताएं
शुक्रवार सुबह मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) स्थित एप्पल स्टोर के बाहर भारी भीड़ उमड़ पड़ी. कई लोग तो रात से ही कतार में लग गए ताकि वे सबसे पहले नया आईफोन खरीद सकें. इसी बीच, पितृ पक्ष के दौरान नई चीजों की खरीदारी करने से बचने की मान्यताओं को लेकर कई लोगों से बात की. कल्पेश ठक्कर का कहना है कि पितृ पक्ष के दौरान मैंने फोन खरीदा जरूर है, लेकिन अभी अनबॉक्स नहीं किया है. इसे नवरात्रि के अवसर पर सोमवार से यूज करना शुरू करूंगा.
असल में इसका कोई ठोस आधार नहीं
बहुत से लोग कहते हैं कि पितृ पक्ष में खरीदारी नहीं करनी चाहिए, लेकिन राकेश सिंह का मानना है कि यह मिथक है. पितृ पक्ष में हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं. उनका आशीर्वाद न होता तो मैं पांच लाख रुपए खर्च करके तीन फोन खरीद ही नहीं पाता. इसी को देखते हुए मेरा मानना है कि लोगों का यह कहना कि इस दौरान नई चीज न खरीदो, यह गलत है. इसी तरह, घनश्याम का कहना है कि लोग इसे मान्यता मानते हैं, लेकिन असल में इसका कोई ठोस आधार नहीं है. वहीं, राजन के मुताबिक, मोबाइल खरीद सकते हैं, लेकिन गाड़ी जैसी बड़ी खरीदारी से बचना चाहिए.
मोबाइल खरीदने में कोई आपत्ति नहीं
आईफोन खरीदने पहुंचे एक अन्य शख्स रोहित ने भी कुछ इसी तरह की बात कही. रोहित ने कहा कि उनके घर में पितृ पक्ष में कपड़े खरीदने से रोका जाता है, लेकिन मोबाइल फोन खरीदने में कोई आपत्ति नहीं है. आईफोन 17 प्रो में 48 मेगापिक्सल का कैमरा, वेपर चैंबर कूलिंग और नए कलर ऑप्शन जैसे फीचर्स शामिल हैं, जो ग्राहकों को खूब लुभा रहे हैं. खासकर वेपर चैंबर कूलिंग के आने से अब यूजर्स को उम्मीद है कि आईफोन में हीटिंग की जो दिक्कत पहले आती थी, वो अब दूर हो जाएगी.
क्या कहते हैं शास्त्र?
श्राद्ध पक्ष को लेकर लोगों में धारणा बनी हुई है यह अशुभ समय है लेकिन ऐसा नहीं है. श्राद्ध पक्ष गणेशोत्सव और नवरात्रि के बीच में आता है, ऐसे में श्राद्ध पक्ष अशुभ कैसे हो सकता है. शास्त्रों में किसी भी शुभ काम करने से पहले गणेशजी की पूजा का विधान है तो इस आधार पर श्राद्ध पक्ष से ज्यादा शुभ समय तो कोई नहीं है. श्राद्ध पक्ष में पितर पृथ्वी लोक पर आते हैं और परिजनों को देखकर प्रसन्न होते हैं. संतान कोई नई चीज खरीदते हैं तो पितरों को खुशी होती है कि उनकी संतान तरक्की कर रही है. साथ ही शास्त्रों में कहीं भी किसी भी प्रकार का कोई उल्लेख नहीं मिलता है कि श्राद्ध पक्ष अशुभ समय है और इस समय कोई खरीदारी नहीं करनी चाहिए.



