
24 दिसंबर 2025 तक भारत में महंगाई दर अपेक्षाकृत संतुलित स्थिति में बनी हुई है। खाद्य पदार्थों, ईंधन और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वर्ष के मध्य में उतार-चढ़ाव जरूर देखा गया, लेकिन वर्ष के अंत तक हालात स्थिर होते नजर आए हैं। इसका सीधा असर आम लोगों की दैनिक खर्च योजना पर पड़ा है।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार बेहतर सप्लाई चेन मैनेजमेंट और सरकारी हस्तक्षेप से खाद्य महंगाई पर नियंत्रण संभव हो पाया। अनाज और दालों की उपलब्धता बढ़ने से बाजार में कीमतें काबू में रहीं। वहीं ईंधन कीमतों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिरता ने भी राहत दी।
हालांकि शहरी इलाकों में किराया, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की लागत अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। मध्यम वर्ग के लिए बचत करना पहले की तुलना में थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसके बावजूद उपभोक्ता खर्च में गिरावट नहीं आई है, जो अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।



