क्राइम

2007 में दरिंदगी, 2019 में दोबारा पोस्टमार्टम और अब परिजनों को मिले अवशेष, रूह कंपा देगी यह कहानी!

2007 में दरिंदगी, 2019 में दोबारा पोस्टमार्टम और अब परिजनों को मिले अवशेष, रूह कंपा देगी यह कहानी

 

अवशेष लेने के बाद उन्होंने रैली निकालने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने बताया कि रैली की अनुमति नहीं है. शमशाद बेगम ने मीडिया से कहा कि 19 वर्षों की लड़ाई के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि वह ईश्वर से प्रार्थना करेंगी कि उनकी मासूम बेटी के हत्यारों को कड़ी से कड़ी सजा मिले.

वर्ष 2007 में दुष्कर्म और हत्या की शिकार 17 वर्षीय छात्रा आयशा मीरा के पार्थिव अवशेष शुक्रवार को प्रशासन ने उनके माता-पिता को सौंप दिए. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 2019 में दोबारा पोस्टमार्टम के लिए अवशेषों को कब्र से निकलवाया था. इन्हें विजयवाड़ा की अदालत में शमशाद बेगम और इकबाल बाशा ने प्राप्त किया.

‘अवशेष अंतिम संस्कार के लिए परिवार को सौंपे जाएं’

पिछले सप्ताह अदालत ने निर्देश दिया था कि आयशा मीरा के अवशेष अंतिम संस्कार के लिए परिवार को सौंपे जाएं. अवशेषों को बाद में तेनाली शहर में दफनाया जाएगा. इस दौरान विभिन्न जनसंगठनों और न्याय की मांग कर रही महिला कार्यकर्ताओं ने शमशाद बेगम और उनके पति के साथ एकजुटता जताई. वे आयशा को न्याय दिलाने की मांग वाले तख्तियां लिए हुए थे.

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