
हाई ब्लड प्रेशर (BP) सिर्फ दिल के लिए ही खतरनाक नहीं होता, बल्कि इसका दिमाग पर भी गहरा और गंभीर असर पड़ता है। हाल ही में किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि उच्च रक्तचाप और अल्जाइमर बीमारी के बीच एक सीधा संबंध है। जब शरीर में लंबे समय तक ब्लड प्रेशर बढ़ा रहता है, तो दिमाग की नसों पर दबाव पड़ता है जिससे दिमाग तक खून और ऑक्सीजन का सही बहाव नहीं हो पाता। इससे दिमाग की कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं और उनकी कार्यक्षमता घटने लगती है, जिससे याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।
अध्ययन से पता चला है कि हाई BP वाले लोगों में अल्जाइमर और डिमेंशिया का खतरा उन लोगों की तुलना में 30% से अधिक होता है जिनका ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। ब्लड प्रेशर की समस्या खासकर उन लोगों में ज्यादा देखने को मिलती है जिनकी उम्र 40 से 60 वर्ष के बीच होती है। यह तथ्य दर्शाता है कि उम्र के इस अहम पड़ाव पर ब्लड प्रेशर का नियंत्रण बेहद जरूरी है ताकि बाद में होने वाली गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से बचा जा सके।
इसके अलावा, उच्च रक्तचाप के कारण दिमाग में सूजन और रक्तवाहिकाओं की क्षति होती है, जो मस्तिष्क विकृति और याददाश्त की समस्याओं को जन्म देती है। मोटापे और डायबिटीज जैसी अन्य बीमारियों के साथ ब्लड प्रेशर का मेल संकट को और बढ़ाता है। मोटे पेट वाले लोगों के शरीर में सूजन की समस्या होती है, जो न्यूरोलॉजिकल सेल्स को घायल कर सकती है और अल्जाइमर जैसे रोगों की संभावना बढ़ा सकती है।
इसलिए ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखना न केवल दिल की सेहत बल्कि दिमाग की सेहत के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। समय पर ब्लड प्रेशर का जांच और उचित इलाज अल्जाइमर जैसी बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।



