संत रितेश्वर के भजन, सत्संग और प्रवंचन से महका नंदिनी का आंगन

*गोंडा*
गोंडा जिले के अंतर्गत नंदिनी नगर नवाबगंज स्थित नंदिनी निकेतनम परिसर में चल रही संत श्री रीतेश्वर महाराज की राष्ट्रकथा का सोमवार को पाँचवाँ दिन गहन राष्ट्रचिंतन, सांस्कृतिक मूल्यों और युवाशक्ति के जागरण के संदेश के साथ सम्पन्न हुआ। कथा पंडाल राष्ट्रभक्ति, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना से सराबोर दिखाई दिया।
प्रवचन में संत श्री रीतेश्वर महाराज ने कहा कि राष्ट्र केवल मानचित्र पर अंकित सीमाओं का नाम नहीं, बल्कि साझा संस्कार, संस्कृति और चेतना का जीवंत स्वरूप है। जब समाज में यह चेतना कमजोर पड़ती है, तब दिशाहीनता जन्म लेती है। उन्होंने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का आधार बताते हुए कहा कि शिक्षा का लक्ष्य मात्र आर्थिक सफलता नहीं, बल्कि चरित्रवान और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक तैयार करना होना चाहिए।
युवाओं के संदर्भ में संत श्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में आगे बढ़ना आवश्यक है, लेकिन अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े बिना प्राप्त उपलब्धियाँ टिकाऊ नहीं होतीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्कार समाज की आत्मा हैं और इनके बिना शिक्षा अधूरी है। संस्कारहीन समाज प्रगति तो कर सकता है, पर स्थायित्व और सुरक्षा नहीं पा सकता।
संत श्री ने भारतीय संस्कृति की विशेषताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि जो समाज अपनी संस्कृति को सहेजता है, वही अपनी दिशा स्वयं निर्धारित करता है। संस्कृति से विमुख समाज धीरे-धीरे परनिर्भर हो जाता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रभक्ति केवल शब्दों या नारों तक सीमित न रहकर व्यवहार और आचरण में दिखाई देनी चाहिए।
कथा के पश्चात आयोजित भजन-कीर्तन ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिक चेतना से जुड़े भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। भजन, ताल और जयघोषों से पूरा परिसर श्रद्धा और ऊर्जा से भर उठा।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही। उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने संत श्री के विचारों को आज के सामाजिक परिदृश्य में अत्यंत प्रासंगिक बताया और कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं में अनुशासन, सकारात्मक दृष्टि और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध को सुदृढ़ करते हैं।



