धमकाने वाला रवैया नहीं चलेगा… शी जिनपिंग ने SCO के मंच से किसे हड़काया? मिलकर चलने की दी सलाह

शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के दौरान जो मुद्दा छाया रहा, उसमें वैश्विक चुनौतियां शामिल रहीं. हालांकि किसी भी देश ने अमेरिका का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया, लेकिन दुनिया में चल रही दादागिरी का मुद्दा लगभग सभी ने उठाया. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए धौंस जमाने वाले व्यवहार की कड़ी आलोचना की.
सोमवार को शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में अपने भाषण के दौरान शी ने कहा – सदस्य देशों के सामने सुरक्षा और विकास की चुनौतियां और भी मुश्किल हो गई हैं. उन्होंने किसी देश का नाम लिए बिना कहा कि-‘कुछ देशों द्वारा अपनाया गया धमकाने वाला रवैया’ मौजूदा वैश्विक संकटों को और गहरा कर रहा है. शी जिनपिंग ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को अशांत और उलझी हुई करार देते हुए कहा कि दुनिया में जिस तरह से उथल-पुथल चल रही है, उसमें हमें शंघाई की भावना अपनाते हुए संगठन की भूमिका को बेहतर बनाना होगा.
शी जिनपिंग के संबोधन की बड़ी बातें क्या?
इस पूरे संबोधन की सबसे बात ये रही कि उन्होंने अमेरिका का नाम तो नहीं लिया लेकिन ये कहा कि कुछ देश धमकाने वाला दादागिरी भरा रवैया अपना रहे हैं. हमें इस तरह के रवैये के खिलाफ खड़े होना होगा.
शी जिनपिंग ने की SCO के मूल सिद्धांतों की सराहना करते हुए कहा कि शंघाई भावना, आपसी विश्वास, लाभ, समानता, संवाद, सभ्यताओं की विविधता का सम्मान और साझा विकास की भावना को दिखाया है.
उन्होंने यह भी कहा कि ‘हमने अपनी सीमाओं पर सैन्य विश्वास बहाली की पहली व्यवस्था की, जिससे सीमाएं दोस्ती और सहयोग का जरिया बन गईं. हम पहले संगठन हैं जिन्होंने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ मिलकर बहुपक्षीय कदम उठाए.’
क्यों महत्वपूर्ण है ये ‘टिप्पणी?
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का यह बयान ऐसे समय में आया है जब चीन अमेरिका के नेतृत्व वाले G7 जैसे पश्चिमी गुटों के मुकाबले SCO और BRICS जैसे मंचों को एक विकल्प के रूप में पेश कर रहा है. इस बैठक ने फिर साबित किया कि एशियाई और अन्य उभरती शक्तियां अब वैश्विक सत्ता संतुलन को नए रूप में गढ़ने के प्रयास में हैं, खासकर अमेरिका जैसे शक्तिशाली राष्ट्रों के दबदबे से हटकर.



