मर्द हैं? तो हो जाएं सावधान! आपके फेफड़ों में घुस रहा है महिलाओं से ज्यादा टॉक्सिक एयर, बचने के ये 5 तरीके अपना लें

वैसे भी कहा जाता है कि महिलाओं में बीमारियों को बर्दाश्त करने की क्षमता ज्यादा होती है लेकिन इस रिसर्च ने इस बात को एक हद तक साबित कर दिया है. दिल्ली के नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने पांच साल के डाटा के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है कि जहरीली हवा का असर पुरुषों और महिलाओं पर एक जैसा नहीं होता. शारीरिक बनावट और लाइफस्टाइल के कारण पुरुषों के फेफड़ों में महिलाओं की तुलना में अधिक टॉक्सिक हवा (प्रदूषित कण) प्रवेश कर रही है. इसलिए यह रिसर्च मर्दों को सावधान करने वाली है. तो फिर सवाल उठता है कि मर्दों को इस बेरहम हवा से बचने के लिए क्या तरकीब अपनानी चाहिए.
मर्दों में भरता है ज्यादा प्रदूषण
निष्कर्षों से एक स्पष्ट लैंगिक अंतर सामने आया है. रिसर्च में कहा गया है कि PM 2.5 मैटर बहुत सूक्ष्म और खतरनाक कण होते हैं और फेफड़ों के भीतर गहराई तक पहुंच सकते हैं.
अगर पुरुष बैठे रहता है तो उसमें RDD (respiratory deposition dose) महिलाओं की तुलना में लगभग 1.4 गुना अधिक था. RDD का मतलब होता है कि प्रति सेकेंड फेफड़ों में ऑक्सीजन भरने की क्षमता.
इसी तरह अगर पुरुष चल रहा है तो उसमें RDD महिलाओं से करीब 1.2 गुना अधिक पाया गया.
अगर मर्द बैठा हुआ तो उसमें RDD महिलाओं की तुलना में 1.34 गुना अधिक पाया गया है.
लिंग के आधार पर क्यों है फर्क
एनएसयूटी (NSUT) के सिविल इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े और इस अध्ययन के सह-लेखक गौरव सैनी ने बताया कि पुरुष आमतौर पर बाहरी वायु प्रदूषण के अधिक संपर्क में रहते हैं, क्योंकि वे बाहर काम करने या अधिक समय बाहर बिताने की संभावना रखते हैं. उन्होंने टीओआई से कहा कि जहां पुरुष बाहरी प्रदूषण के अधिक संपर्क में रहते हैं, वहीं महिलाएं अक्सर इनडोर प्रदूषण के संपर्क में रहती हैं. सांस लेने की मात्रा और सांस लेने की आवृत्ति भी लिंग और शारीरिक गतिविधि के अनुसार अलग-अलग होती है. अध्ययन के एक अन्य लेखक अमरेंद्र सिंह ने बताया कि महिलाओं की सांस लेने की दर आमतौर पर अधिक होती है, जिससे प्रदूषकों का सेवन बढ़ सकता है. हालांकि कुल फेफड़ों की क्षमता और बाहर बिताया गया समय अधिक होने के कारण कुल मिलाकर पुरुष प्रदूषण की अधिक मात्रा को अवशोषित कर लेते हैं.
क्यों है पुरुषों को ज्यादा खतरा
लंग कैपेसिटी : आमतौर पर पुरुषों के फेफड़ों का आकार बड़ा होता है, जिससे वे एक बार में ज्यादा हवा अंदर खींचते हैं. प्रदूषण के मामले में, वे ज्यादा प्रदूषित कण भी अंदर ले लेते हैं.
आउटडोर एक्टिविटी: पुरुष काम के सिलसिले में या एक्सरसाइज के लिए महिलाओं के मुकाबले घर से बाहर ज्यादा समय बिताते हैं.
फिजिकल स्ट्रेस: भारी काम करते समय सांस की गति तेज हो जाती है, जिससे फेफड़ों के गहरे हिस्सों तक जहरीले कण (PM 2.5) पहुंच जाते हैं.
बचने के ये 5 तरीके आज ही अपनाएं
पीक आवर्स में बाहर जाने से बचें: सुबह 7 से 10 और शाम को ट्रैफिक के समय प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा होता है. इस दौरान आउटडोर वर्कआउट या टहलने से बचें.
N95 मास्क का इस्तेमाल: साधारण कपड़े का मास्क धुएं और बारीक कणों को नहीं रोक पाता. घर से बाहर निकलते समय अच्छी क्वालिटी का N95 मास्क पहनें.
डाइट में शामिल करें विटामिन-सी: नींबू, संतरा और आंवला जैसे फलों का सेवन बढ़ाएं. इनमें विटामिन सी होता है जो ये फेफड़ों के ऊतकों (Tissues) को प्रदूषण से होने वाले डैमेज से बचाते हैं.
प्राणायाम और ब्रीदिंग एक्सरसाइज: अनुलोम-विलोम और भस्त्रिका प्राणायाम फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं और जमा हुए टॉक्सिन्स को निकालने में मदद करते हैं.
घर के अंदर रखें एयर प्यूरीफाइंग पौधे: स्नेक प्लांट, एलोवेरा या मनी प्लांट जैसे पौधे घर के अंदर की हवा को शुद्ध करने में मदद करते हैं.
एक्सपर्ट की चेतावनी: यदि आपको लगातार खांसी, सीने में भारीपन या सांस फूलने की समस्या हो रही है, तो इसे सामान्य प्रदूषण समझकर न छोड़ें. तुरंत पल्मोनोलॉजिस्ट से सलाह लें.



