ममता बनर्जी के खिलाफ कोर्ट क्यों पहुंचे ग्रासिम, अल्ट्राटेक और डालमिया, बोले-बंगाल में खत्म हो जाएगा उद्योग

कभी पूरे भारत के कारोबार का प्रमुख केंद्र माना जाने वाला पश्चिम बंगाल आज उद्योगों की कब्रगाह बनता जा रहा है. एक तो वहां पहले से ही उद्योगों के आने में मुश्किलें दिख रही हैं और अब पश्चिम बंगाल सरकार ने एक ऐसा कानून बना दिया है, जिसके बाद कोई भी उद्योगपति वहां अपनी इंडस्ट्री लगाने से पहले 100 बार सोचेगा. हालात इतने खराब हो गए हैं कि अल्ट्राटेक, ग्रासिम और डालमिया सहित कई कंपनियां ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंच चुकी हैं. उनका कहना है कि इस कानून से उद्योगों पर गहरा असर पड़ेगा.
पश्चिम बंगाल के सिंगूर और नंदीग्राम की घटना तो याद ही होगी, जहां टाटा कंपनी के प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन शुरू हो गया था. अब एक बार फिर पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने एक ऐसा कानून पास किया है, जिससे उद्योगों पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है. कंपनियों ने इस कानून को असंवैधानिक बताया है. उनका आरोप है कि सरकार ने कानून बनाया अभी है, लेकिन इसे लागू कर रही है 32 साल पहले से यानी रेट्रोस्पेक्टिव, जो पूरी तरह असंवैधानिक है.
क्या कानून बनाया है सरकार ने
पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल में एक बिल पास किया है, जो कंपनियों को मिलने वाले अनुदान और प्रोत्साहन योजनाओं को खत्म करता है. 2 अप्रैल को नोटिफाई करने से पहले इस कानून को सदन में पास भी किया जा चुका है. यह एक्ट कंपनियों को मिलने वाले सभी प्रोत्साहन को न सिर्फ खत्म करता है, बल्कि इसे साल 1993 से ही खत्म मान रहा है और तब से अब तक मिले सभी तरह की छूट और प्रोत्साहनों को वापस लौटाना होगा. इसका मतलब है कि पिछले 32 साल में जितनी भी स्कीम के तहत कंपनियों को छूट मिली होगी, सब सरकार को वापस लौटानी पड़ेगी.
7 नवंबर को होग मामले की सुनवाई
सरकार के इस कानून के खिलाफ अल्ट्राटेक सीमेंट, इलेक्ट्रोस्टील कास्टिंग लिमिटेड, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, नुवोको विस्टास और डालमिया सीमेंट ने कलकत्ता हाईकोर्ट में अपील दाखिल की है. सभी कंपनियों ने इसके खिलाफ अलग-अलग अपील दाखिल की है, लेकिन हाईकोर्ट इन सभी पर 7 नवंबर को सुनवाई करेगी. कंपनियों का कहना है कि यह कानून असंवैधानिक है और प्रावधान यह कहता है कि इसे पूरी तरह निरस्त किया जाए.
क्या है कानून का मकसद
इस कानून को पारित करते समय सरकार ने अपने कहा कि इसका मकसद पश्चिम बंगाल राज्य में चल रही तमाम कल्याणकारी योजनाओं को वित्तीय मदद उपलब्ध कराना है. राज्य के सामाजिक रूप से पिछड़े और आर्थिक रूप से हाशिये पर रहने वालों को इसके जरिये वित्तीय मदद मुहैया कराई जाएगी. सरकार का कहना है कि कंपनियों को छूट और रियायत देने के बजाय आम आदमी को इसका फायदा दिलाना ही इस कानून का मकसद है.
कंपनियों को क्या सुविधाएं
राज्य सरकार के अधिकारियों के अनुसार, पहले कंपनियों को टैक्स, भूमि अधिग्रहण, बिजली, ब्याज के भुगतान आदि पर सब्सिडी मिलती थी. अब प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों को कोई भी प्रोत्साहन, वित्तीय लाभ, सब्सिडी, ब्याज माफी, शुल्क या टैक्स में छूट आदि नहीं दी जाएगी. अब किसी भी कंपनी को अपने किसी भी तरह के बकाया राशि पर दावा करने का कोई अधिकार नहीं रहेगा.
सरकार ने दिया था नई नीति का भरोसा
उद्योग मामले एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि बिल पास होने के बाद कंपनियों ने इससे कारोबार में समस्या आने की बात कही थी. सरकार ने उन्हें बताया कि वह इस समस्या को हल करने के लिए नई औद्योगिक नीति बना रही है, लेकिन इससे पहले कई कंपनियां कोर्ट चली गईं. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार उद्योगों पर पैसे खर्च करने के बजाय कल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता देने पर जोर देती है



