भारत के लिए कनाडा ने खोल दी तिजोरी, जो काम 8 साल में नहीं हुआ, वो कार्नी ने दिल्ली आकर 2 दिन में कर डाला!

*भारत के लिए कनाडा ने खोल दी तिजोरी, जो काम 8 साल में नहीं हुआ, वो कार्नी ने दिल्ली आकर 2 दिन में कर डाला!*
जिस वक्त मिडिल ईस्ट में संग्राम मचा हुआ था, ठीक उसी वक्त भारत में एक अलग ही डील हो रही थी. भारत की यात्रा पर आए कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कड़वाहट भूल रिश्तों की नई इबारत लिख रहे थे. विदेश मंत्रालय के सचिव पी कुमारन के शब्दों में कहें तो, पिछले आठ वर्षों में जो नहीं हुआ, वह इन दो दिनों में हो गया है. कनाडा ने भारत के लिए अपनी तिजोरी खोल दी है. वह हमें यूरेनियम देगा तो क्रिटिकल मिनरल्स भी. भारी इन्वेस्टमेंट भी करेगा तो हमारे लोगों के लिए नए मौके भी खोलेगा.
इंडिया-कनाडा CEO फोरम को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, जब भारत और कनाडा एक साथ खड़े होते हैं, तो वे सिर्फ दो अर्थव्यवस्थाओं को नहीं जोड़ते, बल्कि पूंजी और क्षमता को मिलाकर एक आर्थिक शक्ति बनाते हैं. हम क्लीन एनर्जी पर साथ काम करने जा रहे हैं तो क्रिटिकल मिनरल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर भी. कनाडा के इनोवेशन और भारत के विशाल स्केल को मिलाकर बैटरी और एनर्जी स्टोरेज के क्षेत्र में क्रांति लाई जाएगी. दोनों देश मिलकर साझा AI कंप्यूट कॉरिडोर और स्टार्ट-अप्स के लिए AI इनोवेशन सैंडबॉक्स बनाएंगे. इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और इंजीनियरिंग में कनाडा की तकनीक और भारत के स्केल को मिलाकर ग्लोबल वैल्यू चेन को मजबूत किया जाएगा.
आखिर हुआ क्या?
भारत और कनाडा व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसका लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंचाना है.
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों का संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद 6 ट्रिलियन डॉलर यानी 6000 अरब से अधिक है, जो इसे एक बड़ी वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाता है.
कनाडाई पेंशन फंड्स ने भारत के विकास और बाजार पर गहरा भरोसा जताते हुए अब तक भारत में लगभग 100 बिलियन डॉलर का निवेश किया है.
2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा के भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए कनाडा यूरेनियम की निर्बाध सप्लाई करेगा.यह भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण फैसला है.
क्रिटिकल मिनरल्स पर बड़ी डील हुई है. भारत को इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए क्रिटिकल मिनरल्स की जरूरत है, अब कनाडा हमें यह देगा. इतना ही नहीं टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी होगा.
भारत-कनाडा-ऑस्ट्रेलिया के बीच एक ट्रांयगल पर साइन हुआ है. यह तीन उभरती टेक्नोलॉजी और इनोवेशन वाले देशों के बीच एक अलग तरह की डील है. यह भारत के लिए काफी फायदेमंद है.
फूड प्रोसेसिंग कैपेसिटी को मजबूत करने और पल्स प्रोटीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाएगा. इसकी डील भी इस दौरे में हुई है. इसका फायदा भारत को होने वाला है.
भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग और कनाडा की कंपनी कैमेको के बीच यूरेनियम की सप्लाई के लिए लंबी अवधि की डील हुई है. यह 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा के लक्ष्य के लिए अहम है.
कनाडा 3 वर्षों तक हर साल 300 भारतीय छात्रों को साइंस, इंजीनियरिंग और आर्ट जैसे विषयों में 12 सप्ताह की पूरी तरह से फंडेड रिसर्च इंटर्नशिप देगा.
रिन्यूवल एनर्जी पर भी डील हुई है. कनाडा सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोमास और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में क्षमता निर्माण और ब्रेस्ट प्रेक्टिस शेयर करेगा.
इन समझौतों के अलावा, विश्वविद्यालयों के बीच AI और कृषि जैसे क्षेत्रों में 24 पार्टनरशिप्स की घोषणा की गई है. कनाडा अब ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस और इंटरनेशनल सोलर अलायंस में भी शामिल हो गया है. इसके साथ ही रक्षा वार्ता और संसद मैत्री समूह की स्थापना भी की गई है.



