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रुपए का नाम कैसे पड़ा: शेरशाह सूरी बने जनक

भारतीय मुद्रा ‘रुपया’ का नाम संस्कृत शब्द ‘रूप्य’ या ‘रौप्य’ से पड़ा है, जिसका अर्थ चांदी या चांदी का चमकदार सिक्का होता है।​ प्राचीन काल से भारत में चांदी के सिक्के प्रचलित थे, लेकिन इसका मानकीकृत रूप अफगान शासक शेरशाह सूरी ने 1540-1545 के दौरान दिया, जिन्हें रुपए का जनक माना जाता है।​ उन्होंने 178 ग्रेन वजन का चांदी का सिक्का जारी किया, जो 11.534 ग्राम का था और व्यापार को सरल बनाने के लिए प्रसिद्ध हुआ।​

शेरशाह सूरी की मृत्यु के बाद उनके रुपए को मुगल सम्राटों जैसे अकबर ने अपनाया और इसे और मजबूत बनाया।​ अकबर ने रुपए को 11.53 ग्राम चांदी का बनाया तथा सोने के दाम भी जोड़े।​ ब्रिटिश काल में ईस्ट इंडिया कंपनी ने सिल्वर रुपया जारी किया, जो 1835 में मानकीकृत हुआ।​ स्वतंत्र भारत में 1947 के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने कागजी नोट जारी किए, और आज डिजिटल रुपया (ई-रुपया) भी आ गया है।​

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former crime reporter DAINIK JAGRAN 2001 and Special Correspondent SWATANTRA BHARAT Gorakhpur. Chief Editor SAAMYIK HANS Hindi News Paper/news portal/

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